वन विभाग की ओर से 1 मई शाम 5 बजे से 2 मई शाम 5 बजे तक 24 घंटे की वन्यजीव गणना कराई गई। इस दौरान 32 वाटर हॉल पर 33 टीमों ने तैनात रहकर गणना पूरी की। खास बात यह रही कि इस बार पहली बार गणना शाम के समय कराई गई। गणना में मांसाहारी, शाकाहारी और पक्षियों की संख्या में बढ़ोतरी दर्ज की गई, लेकिन चौंकाने वाली बात यह रही कि इस बार एक भी पैंथर नजर नहीं आया। इसके चलते वर्ष 2026-27 की गणना में पैंथर की संख्या शून्य रही, जबकि वर्ष 2025-26 में यह संख्या 3 थी। वन विभाग के हालिया आंकड़ों के अनुसार बयाना रेंज में राष्ट्रीय पक्षी मोर की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2025-26 में मोरों की संख्या 378 थी, जो बढ़कर वर्ष 2026-27 में 800 हो गई। इस तरह पिछले साल के मुकाबले 422 मोर अधिक पाए गए। इसके अलावा सारस क्रेन की संख्या में भी इजाफा हुआ है और इस बार 28 सारस अधिक दर्ज किए गए हैं। अन्य वन्यजीवों में सियार 709, नीलगाय 702, जंगली सुअर 218 और लंगूर 269 की संख्या दर्ज की गई। शिकार पर नियंत्रण के कारण वन्यजीवों की संख्या में वृद्धि जिले की बयाना वन रेंज से वन्यजीव प्रेमियों के लिए अच्छी खबर सामने आई है। यहां पहली बार दुनिया का सबसे छोटा सफेद गिद्ध — मिस्र गिद्ध (इजिप्शियन वल्चर) देखा गया है। इस दुर्लभ पक्षी की मौजूदगी से क्षेत्र की जैव विविधता और संतुलन को लेकर सकारात्मक संकेत मिले हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि वन विभाग द्वारा किए जा रहे संरक्षण कार्य, जल स्रोतों का बेहतर प्रबंधन और शिकार पर नियंत्रण के कारण वन्यजीवों की संख्या में यह वृद्धि देखने को मिल रही है। एसीएफ सुरेश चौधरी ने बताया कि आने वाले समय में संरक्षण प्रयासों को और मजबूत किया जाएगा, ताकि इस तरह की दुर्लभ प्रजातियां सुरक्षित रह सकें और वन्यजीवों की संख्या में लगातार वृद्धि बनी रहे।