देशभर के कृषि इनपुट व्यापारियों ने अपनी समस्याओं के समाधान की मांग को लेकर एक दिवसीय प्रतीकात्मक हड़ताल की। मेवाड़ एग्री इनपुट डीलर्स एसोसिएशन (मैदा) के बैनर तले प्रधानमंत्री के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में बताया- देश में लगभग 5 लाख पंजीकृत कृषि इनपुट व्यापारी कई वर्षों से प्रशासनिक और नीतिगत समस्याओं का सामना कर रहे हैं। बार-बार मांग उठाने के बावजूद समाधान न होने से व्यापारियों में असंतोष बढ़ रहा है। ज्ञापन में बताई 12 मांगें एसोसिएशन ने अपनी 12 प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें उर्वरक कंपनियों द्वारा अनावश्यक उत्पाद थोपने की बाध्यता समाप्त करना, एफओआर (फ्री ऑन रोड) व्यवस्था सुनिश्चित कर डीलर पर अतिरिक्त खर्च का बोझ कम करना और डीलर मार्जिन को 8 प्रतिशत तक बढ़ाना शामिल है। अन्य मांगों में ग्रामीण खुदरा विक्रेताओं के लिए 'साथी' पोर्टल को वैकल्पिक बनाना, अवैध बीज बिक्री पर रोक लगाना, विक्रेता की जिम्मेदारी सीमित कर निर्माण कंपनियों को उत्तरदायी बनाना, और एक्सपायरी व पुराने स्टॉक को कंपनियों द्वारा वापस लेने का नियम अनिवार्य करना शामिल है। इसके अलावा, नए कानूनों में रिटेल डीलर को 'प्रथम पक्ष' बनाकर संरक्षण देना, शिकायतों की जांच के लिए जिला स्तर पर कमेटी गठित करना, लाइसेंस प्रक्रिया को सरल व समयबद्ध करना, पीसी (प्रिंसिपल सर्टिफिकेट) की अनिवार्यता समाप्त करना और दोहरे लाइसेंस सिस्टम को खत्म करना भी प्रमुख मांगें हैं। आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि यदि समस्याओं का शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। इस हड़ताल के कारण एक दिन के लिए खाद, बीज और कीटनाशकों की आपूर्ति बाधित हो सकती है, जिससे किसानों को असुविधा का सामना करना पड़ सकता है। ज्ञापन के माध्यम से केंद्र सरकार से अनुरोध किया गया है कि संबंधित मंत्रालयों और अधिकारियों को निर्देशित कर इन समस्याओं का जल्द से जल्द समाधान किया जाए। इसका उद्देश्य कृषि व्यवस्था को प्रभावित होने से बचाना और किसानों को समय पर आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराना है।