भास्कर न्यूज | टोंक गणेश चतुर्थी पर हर साल होने वाले गणेशोत्सव के आगामी आयोजन को लेकर श्री अन्नपूर्णा गणेशजी-बालाजी प्रन्यास समिति और आनंदम् संस्था के बीच विवाद गहराता जा रहा है। शनिवार को डाक बंगले में आयोजित प्रेसवार्ता में आनंदम् संस्था के पदाधिकारियों ने प्रन्यास समिति की ओर से लगाए गए आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि संस्था का उद्देश्य केवल सनातन संस्कृति के इस महत्वपूर्ण आयोजन को निर्विघ्न संपन्न कराना है। संस्था अध्यक्ष भगवानदास गुर्जर, कार्यक्रम अध्यक्ष डॉ. प्रभु बाडोलिया, राजाराम यादव, रवि शर्मा, मोती पहाड़िया, सुरेश शर्मा, रमेश सर्राफ व राजेश मूमिया ने कहा कि जिस भोजनशाला की भूमि को लेकर विवाद खड़ा किया जा रहा है, उसे तत्कालीन महंत ने वर्ष 1981 में छावनी निवासी ताराचंद रैगर को बेच दिया था। बाद में आनंदम् संस्था की समझाइश पर संबंधित व्यक्ति ने अपना अधिकार छोड़ते हुए भूमि भगवान गणपति के नाम समर्पित कर दी। इधर महंत कैलाशपुरी ने संस्था के दावों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि संस्था जनता में भ्रम फैला रही है, उन्होंने स्पष्ट किया कि इस मामले में संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के लिए अपने अधिवक्ता से सलाह ली जा रही है। विदित रहे शुक्रवार को श्री अन्नपूर्णा गणेशजी, बालाजी प्रन्यास समिति के संरक्षक व महंत कैलाशपुरी व अन्य पदाधिकारियों ने प्रेसवार्ता कर आनंदम् संस्था पर गंभीर आरोप लगाए थे। इधर संस्था का दावा है कि वह पिछले 35 सालों से यहां दो दिवसीय गणेशोत्सव, भजन संध्या, मेला और 56 भोग की झांकी का आयोजन करती आ रही है। महंत कैलाशपुरी का पूरा पक्ष : महंत कैलाशपुरी ने कहा आनंदम् संस्था जनता को भ्रमित कर रही है। भोजनशाला की जिस जमीन की बात हो रही है, उसे मैंने नहीं बेची। यदि मेरे पिता के समय कोई लेन-देन हुआ होगा तो उसकी मुझे जानकारी नहीं है। संस्था जिस दस्तावेज का हवाला दे रही है, वह सोरण पंचायत का कागज है। उसमें न तो विधिवत विक्रय पत्र है और न ही यह स्पष्ट है कि जमीन कितनी राशि में बेची गई। जिस व्यक्ति के नाम का कागज दिखाया जा रहा है, उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई को लेकर मैं अपने अधिवक्ता से चर्चा कर रहा हूं।