प्रतापगढ़ की कृषि उपज मंडी में इन दिनों मक्का और सोयाबीन की आवक बढ़ने से कारोबार में तेजी आई है। मंडी में रोजाना बड़ी संख्या में किसान अपनी उपज लेकर पहुंच रहे हैं। इससे मंडी में करीब 10 करोड़ रुपए का कारोबार हो रहा है। वहीं, उपज लेकर आने वाले वाहनों की संख्या बढ़ने से रोजाना करीब एक किलोमीटर लंबा जाम लग रहा है। इससे मंडी क्षेत्र में आवागमन प्रभावित हो रहा है। रोजाना 10 हजार बोरी मक्का-सोयाबीन की आवक मंडी सचिव संतोष मोदी के अनुसार, कृषि उपज मंडी में प्रतिदिन करीब 5 हजार बोरी मक्का और 3 हजार बोरी सोयाबीन की आवक हो रही है। इसके अलावा अन्य कृषि जिंसों की करीब 2 हजार बोरी भी मंडी में पहुंच रही हैं। इस तरह रोजाना कुल करीब 10 हजार बोरी कृषि उपज की आवक हो रही है। बढ़ती आवक के चलते मंडी में प्रतिदिन लगभग 10 करोड़ रुपए का कारोबार हो रहा है। पिछले साल के मुकाबले बढ़े मक्का और सोयाबीन के भाव इस साल किसानों को मक्का और सोयाबीन के बेहतर भाव मिल रहे हैं। मंडी में सोयाबीन 7,000 से 7,500 रुपए प्रति क्विंटल बिक रही है, जबकि पिछले साल इसका भाव करीब 5,000 रुपए प्रति क्विंटल था। इसी तरह मक्का के भाव में भी बढ़ोतरी हुई है। इस साल मक्का 2,500 से 2,800 रुपए प्रति क्विंटल बिक रहा है। पिछले साल इसके भाव 1,500 से 1,700 रुपए प्रति क्विंटल के बीच थे। बेहतर भाव मिलने से किसान अपनी उपज बेचने के लिए बड़ी संख्या में मंडी पहुंच रहे हैं। महाराष्ट्र और गुजरात में प्रतापगढ़ के मक्के की ज्यादा मांग प्रतापगढ़ के मक्के की मांग महाराष्ट्र, गुजरात समेत दूसरे राज्यों में भी बनी हुई है। चित्तौड़गढ़, प्रतापगढ़ और निंबाहेड़ा क्षेत्र में पैदा होने वाले मक्के में ग्लूकोज और इथेनॉल बनाने के लिए उपयोगी गुण पाए जाते हैं। इसी वजह से औद्योगिक उपयोग के लिए इस क्षेत्र के मक्के की मांग बढ़ रही है। दूसरे राज्यों से मांग आने के कारण स्थानीय मंडियों में मक्के का कारोबार भी बढ़ा है। वाहनों की भीड़ से मंडी के बाहर लग रहा जाम मक्का और सोयाबीन की बढ़ती आवक के साथ मंडी में आने वाले वाहनों की संख्या भी बढ़ गई है। उपज से भरे वाहनों के कारण प्रतिदिन करीब एक किलोमीटर लंबा जाम लग रहा है। इससे किसानों और दूसरे वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मंडी में बढ़ते कारोबार के बीच वाहनों की आवाजाही व्यवस्था बनाए रखना भी चुनौती बन गया है।