नगर निगम प्रशासन को भले ही मीडिया की ओर से उठाए जाने वाले मुद्दों से परेशानी हो रही हो मगर सोमवार को उनके ही विभाग के प्रमुख शासन सचिव ने निगम प्रशासन को आइना दिखाया। उन्होंने समीक्षा मीटिंग में जमकर अफ्सरों को लताड़ लगाते हुए दो-चार लोगों को सस्पेंड करने तक की चेतावनी दे दी। बोले, टिपर घरों तक जाती नहीं। सिर्फ गोबर भरकर वजन के हिसाब से पेमेंट हो रहा। एक बाबू इतने बड़े शहर का मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी है। निगम आयुक्त से कहा, एक महीना आए हो गया। अब फील्ड में निकलो। सारे अधिकारी आधा दिन सिर्फ फील्ड में रहेंगे। दरअसल डीएलबी के प्रमुख सचिव रवि जैन ने सोमवार को निगम सभागार में संभाग के निकाय अधिकारियों की मीटिंग ली। मीटिंग लेने से पहले वे शहर में घूमे। निगम अधिकारियों ने उनके आने-जाने वाले रास्तों को साफ कराकर चूना तक डलवा दिया। निगम ने सर्किट हाउस, कीर्ति स्तंभ चौराहा, लालगढ़ पैलेस जैसे रूट को साफ सुथरा कर दिया। मगर जैन इस रूट से ना आकर सीधे रामपुरिया हवेली, कोचरों के चौक, रानीबाजार की ओर निकल गए। रानीबाजार पुलिया के रास्ते लौटे। सूरज टाकीज, अंबेडकर सर्किल होते हुए वापस आए। उन्होंने इतने में पूरे शहर की हकीकत देख ली। उसके बाद उन्होंने अधिकारियों की क्लास लगाई। बोले, नालियां पॉलीथिन से अटी पड़ी हैं। क्या सफाई होती है। गोबर भरकर टिपर ले जा रही हैं और उसके वजन से पेमेंट हो रहा है। उन्होंने निगम आयुक्त से पूछा, आपके एसआई करते क्या हैं। दो-चार को सस्पेंड करो। आप नहीं करोगे तो मैं कर दूंगा। बोले, आपके यहां एक बाबू को एचओ बना रखा है। वो क्या शहर संभालेगा। उसे तत्काल हटाओ वरना मैं सस्पेंड कर दूंगा। वे यहीं नहीं रुके। आयुक्त से बोले, एक महीना आए हो गया। अब फील्ड में निकलो। सारे अधिकारी आधे दिन फील्ड में रहें। मैं रिव्यू करूंगा। मुझे वीडियो बनाकर भेजें। पिंक टॉयलेट: बजट घोषणाओं का बुरा हाल निगम ने सर्किट हाउस, लालगढ़ कीर्ति स्तंभ पर सफाई की, वे कोचरों के चौक और रानीबाजार गए बोले-पता नहीं कैसे रैंक आती है : जब प्रमुख सचिव रवि जैन सफाई पर बात कर रहे थे उसी दौरान उन्होंने स्वच्छ भारत मिशन में रैंक पूछी। जवाब मिलने पर बोले, पता नहीं कैसे रैंक आती है। जो हालात हैं उससे तो रैंक सुधरती लग नहीं रही। संभाग के निकायों में आम जनता की सुविधाओं के लिए बनाई गई योजनाओं की स्थिति बेहद चिंताजनक है। संभाग की सोमवार को हुई समीक्षा बैठक में सामने आए आंकड़े बताते हैं कि विभाग और निकाय अपनी जिम्मेदारियों को निभाने में सुस्त नजर आ रहे हैं। शहर को कचरा मुक्त करने से लेकर महिलाओं के लिए जरूरी पिंक टॉयलेट तक की घोषणाएं फाइलों और टेंडरों के बीच उलझी हुई हैं। लेगेसी वेस्ट के निस्तारण के लिए कुल 29 कार्य स्वीकृत थे जिनमें से 4 अभी भी बाकी हैं। ठोस कचरा प्रबंधन प्लांट की स्थिति और भी खराब है। पूरे संभाग में प्रस्तावित 26 प्लांट में से केवल एक प्लांट ही पूरा हो सका है। बीकानेर जिले में 4 में से एक भी प्लांट पूरा नहीं है जबकि श्रीगंगानगर और चूरू में भी अधिकांश कार्य केवल कागजों पर ‘प्रक्रियाधीन’ हैं। बीकानेर के मुख्य प्लांट का सिविल काम केवल 40 प्रतिशत ही हुआ है और मशीनरी लगना अभी बाकी है।