पंजाब विधानसभा के विशेष सत्र के अंतिम दिन मंगलवार को राजस्थान से पानी की रॉयल्टी का मुद्दा उठा। इस दौरान मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि 1960 तक राजस्थान हमें पानी की रॉयल्टी देता रहा है। अब वह हमसे मुफ्त पानी लेकर आगे बेचता है। यह तो बिजनेस हो गया। हमसे कच्चा माल मुफ्त ले लिया और प्रोडक्ट बनाकर बेच दिया। उन्होंने कहा कि हमारा 1 लाख 44 हजार करोड़ रुपए की रॉयल्टी का हक बनता है। सीएम मान ने कहा कि पानी से जुड़ा जो प्रस्ताव मंत्री लेकर आए हैं, मैं उसका समर्थन करता हूं। पानी की एक-एक बूंद के लिए आवाज उठाएंगे। इसके लिए लड़ना पड़ा तो लड़ेंगे। अदालत से लेकर सड़कों तक हर जगह लड़ाई लड़ेंगे। इससे पहले सिंचाई मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने सदन में प्रस्ताव पेश किया कि सतलुज, रावी और ब्यास नदियां राजस्थान से होकर नहीं गुजरतीं, इसलिए राजस्थान रिपेरियन राज्य नहीं है। इसके बावजूद दशकों से पंजाब का पानी राजस्थान को मुफ्त में दिया जा रहा है। इससे राजस्थान राजस्व कमा रहा है, जबकि पंजाब खुद गंभीर जल संकट से जूझ रहा है। उन्होंने कहा कि प्रस्ताव में मांग की गई कि राजस्थान सरकार पंजाब को दिए जाने वाले पानी की कीमत चुकाए। साथ ही केंद्र सरकार से अनुरोध किया गया कि वह भविष्य में भी राजस्थान को दिए जाने वाले पानी का भुगतान हर साल पंजाब को दिलाना सुनिश्चित करे। वहीं लास्ट में सारे प्रस्ताव पास हो गए। इसके साथ ही सेशन खत्म हो गया। राजस्थान सरकार पंजाब सरकार की मांग को ठुकरा चुकी
राजस्थान सरकार पंजाब सीएम की मांग को इस साल मार्च में ही ठुकरा चुकी है। इस साल 19 मार्च को पंजाब सीएम ने 1.44 लाख करोड़ रॉयल्टी मांगते हुए पानी रोकने की चेतावनी दी थी। 20 मार्च को राजस्थान के जलसंसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत ने पंजाब सीएम की मांग को सिरे से खारिज कर दिया था। पंजाब सरकार ने राजस्थान सरकार को चिट्ठी लिखकर भी रॉयल्टी की मांग की थी, सरकार ने उस मांग को खारिज कर दिया। राजस्थान के जलसंधान मंत्री सुरेश सिंह रावत ने तर्क दिया था कि पंजाब की मांग असंवैधानिक है, सरकार पैसा नहीं देगी। किसी एक राज्य का पानी पर रॉयल्टी या वाणिज्यिक दावा करना संविधान की मूल भावना और स्थापित विधिक सिद्धांतों के खिलाफ है। कैसे हुई विवाद की शुरुआत पंजाब और राजस्थान के बीच पानी की रॉयल्टी का विवाद ब्रिटिश शासन के समय से जुड़ा है। 4 सितंबर, 1920 को शिमला में ब्रिटिश सरकार, बहावलपुर और बीकानेर रियासतों के बीच समझौता हुआ। इसके तहत बीकानेर को फिरोजपुर हेडवर्क्स से गंगनहर के जरिए सतलुज का पानी दिया जाना था। इसके बदले बीकानेर रियासत रॉयल्टी देती थी। पंजाब सरकार का दावा है कि राजस्थान ने 1960 तक भुगतान किया, लेकिन इसके बाद रॉयल्टी देना बंद कर दिया। कितनी रकम का दावा पंजाब सरकार ने राजस्थान से साल 1961 से 2025 तक पानी के इस्तेमाल के बदले ₹1.44 लाख करोड़ रुपए की रॉयल्टी मांगी है। सरकार की गणना में पुरानी दरों के साथ 8% ब्याज भी शामिल बताया गया है।