पुष्कर सरोवर के जयपुर घाट पर खडेश्वरी तप करने वाली रूसी नागरिक और नाथ संप्रदाय की साध्वी योगिनी अन्नपूर्णा नाथ अब अग्नि तपस्या कर रही है। यह साधना रविवार 3 मई से शुरू हुई जो 25 मई तक चलेगी। पुष्कर की छोटी बस्ती स्थित श्मशान स्थल, अघोरी सीताराम बाबा के आश्रम में यह तपस्या चल रही हैं। रोजाना सुबह 11 बजे से दोपहर 2:15 बजे तक सवा तीन घंटे, 9 धूणी के बीच बैठकर शिव साधना और गुरु बीज मंत्र का जाप करती हैं। यह अन्नपूर्णा नाथ की पहली अग्नि तपस्या है। वहीं गुरु बाल योगी दीपक नाथ की यह पांचवीं तपस्या है। योगिनी अन्नपूर्णा ने कहा- तपस्या का उद्देश्य सिद्धि है। सिद्धि स्वयं तपस्या का ही परिणाम है। उनका कार्य केवल व्यक्तिगत साधना तक सीमित नहीं है, बल्कि वे समाज और जनकल्याण के लिए भी काम कर रही हैं। आखिरी दिन 108 कंडों की धूणी जलाई जाएगी गुरू दीपक नाथ ने बताया- यह तपस्या बहुत कठिन है और तपस्वी जीवन का प्रतीक है। साधना के दौरान दोनों साधक अपने शरीर पर गौमय भस्म का लेप करते हैं। धूणी को गोबर के कंडों से जलाया जाता है, जिनकी संख्या रोजाना बढ़ाई जाती है। अंतिम दिन 108 कंडों से धुणी जलाई जाएगी। धुणी के बीच 3 से 4 फीट की दूरी रखी गई है, जिससे साधना का ताप और प्रभाव तेज होता है। तपस्या के दौरान रोजाना हवन, पूजन और आरती की जाती है। 25 मई को इस कठिन साधना का समापन संत भंडारे और पूर्णाहुति के साथ होगा। दीपक नाथ ने बताया- ‘नौ धूणी अग्नि तपस्या’ नाथ संप्रदाय की प्राचीन परंपरा है, जिसे संत-महात्मा आदि अनादि काल से करते आ रहे हैं। देश के हरियाणा, जयपुर, जोधपुर, सिरोही सहित विभिन्न स्थानों पर भी संत इसी प्रकार की साधना कर रहे हैं। संतों की तपस्या केवल व्यक्तिगत साधना नहीं, बल्कि नगर के कल्याण, विश्व शांति और जनहित के लिए होती है। दर्शन करने वाला हर श्रद्धालु पुण्य का भागी बनता है। उन्होंने बताया- कुछ संत 21, कुछ 108 और कुछ 1100 धूणी की तपस्या करते हैं। यह परंपरा यज्ञ की तरह ही है। जैसे पंडित यज्ञ करते हैं, वैसे ही संत धूणी तपस्या करते हैं। उज्जैन सहित कई स्थानों पर भी इस प्रकार की साधनाएं चल रही हैं। तपस्या 3 मई से 25 मई तक चलेगी। शुरुआत 21 कंडों से होती है और रोजाना संख्या बढ़ती है। वर्तमान में प्रत्येक धूणी पर करीब 40 कंडे रखे जा रहे हैं। दिनचर्या में सुबह आरती-पूजा, दोपहर तपस्या, शाम आरती और रात्रि में हवन शामिल है। पुष्कर सरोवर पर की थी 9 दिन खड़े होकर तपस्या अन्नपूर्णा नाथ ने बताया- वो टूरिस्ट वीजा पर भारत में रहती हैं। वीजा खत्म होने के बाद वापस अपने देश या किसी अन्य देश जाकर दोबारा टूरिस्ट वीजा पर भारत लौट आती हैं। पिछली बार अगस्त 2025 में वो नेपाल में पशुपतिनाथ के दर्शन करके लौटी हैं। हाल ही में उन्होंने पुष्कर सरोवर के किनारे 9 दिन तक खड़े रहकर तपस्या भी की थी। 10 साल पहले नाथ संप्रदाय से जुड़ी योगिनी अन्नपूर्णा नाथ ने बताया- वह 17 साल पहले भारत आई थीं। 10 साल पहले भारतीय संस्कृति और योग से प्रभावित होकर नाथ संप्रदाय के योगियों से जुड़ी थीं। उन्होंने परिवार का त्याग कर आध्यात्मिक जीवन का मार्ग चुना। वर्तमान में वे 52 शक्तिपीठों की यात्रा पर हैं, वह अब तक 35 शक्तिपीठों के दर्शन कर चुकी हैं। कुछ शक्तिपीठ बांग्लादेश, पाकिस्तान और श्रीलंका में हैं, जहां अभी जाना संभव नहीं हो पाया है। योगिनी अन्नपूर्णा ने बताया कि मेरा जन्म तत्कानील सोवियत संघ (USSR) में हुआ था। पालन-पोषण कजाकिस्तान में हुआ है। अभी मेरे पास रूसी नागरिकता है। ……. योगिनी अन्नपूर्णा से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… रूसी महिला की पुष्कर में 9 दिनों की खड़ी तपस्या:पैर सूज गए, फिर भी नहीं बैठी; 8 महीने से भारत में हैं योगिनी अन्नपूर्णा पुष्कर सरोवर के जयपुर घाट पर रूसी नागरिक और नाथ संप्रदाय की साध्वी योगिनी अन्नपूर्णा नाथ ‘खड़ेश्वरी तप’ कर रही हैं। इसमें बिना बैठे और बिना सोए 24 घंटे साधना करना पड़ती है। (पूरी खबर पढ़ें…)