राजस्थान के रणथंभौर टाइगर रिजर्व में 77 टाइगर हैं। इसमें मछली जैसी बाघिन के नाम इतिहास में दर्ज है। इन्हीं के बीच एक टाइगर भी खासा चर्चित रहा। जिसका नाम था- डॉलर। ये सम्भवतया पहला ऐसा बाघ था, जिसने किसी और बाघिन की मौत के बाद उसके शावकों को ढाई साल तक पाला था। उन्हें शिकार करना और जंगल में रहने के गुर सिखाए। जब ये बाघिन (एसटी-9 और एसटी-10) 3 साल की हुई तो इन्हें सरिस्का शिफ्ट कर दिया। डॉलर नाम की कहानी भी अपने आप में अलग है। डॉलर की मौत 15 साल की उम्र में 2020 में टेरिटरी फाइट में हुई थी। पोस्टमॉर्टम में डॉलर की सिर की हड्डियां टूटी हुई मिली थी।पढ़िए- रणथंभौर के बाघ डॉलर की कहानी… साल 2007 में हुआ था डॉलर का जन्म वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट और रणथंभौर नेचर गाइड एसोसिएशन के अध्यक्ष यादवेन्द्र सिंह ने बताया- रणथंभौर नेशनल पार्क के बाघ टी-25 का साल 2007 में पैदा हुआ था। वह लोहपुर-नगदी क्षेत्र की बाघिन (T-22) और नर बाघ झुमरू (T-20) का शावक था। साल 2011 में कचीदा वन क्षेत्र में एक बाघिन की मौत के बाद उसकी दो फीमेल शावक बीना-1 (ST9) और बीना-2 ST(10) अकेली रह गई थीं। दोनों करीब तीन महीने की थीं। डॉलर ने इन्हें अपनी टेरिटरी में होने के बावजूद कभी नुकसान नहीं पहुंचाया। मादा शावकों की पिता की तरह देखभाल की थी। नन्ही टाइग्रेस के साथ रहता, रक्षा कवच बनकर यादवेन्द्र सिंह ने बताया- बाघिन की मौत के बाद वन विभाग ने दोनों शावकों को पालने के लिए फीड देना शुरू किया। इस दौरान डॉलर मेल दोनों शावकों के साथ ही रहता था। वह उन्हें एक पल के लिए भी अकेला नहीं छोड़ता था। खाना खिलाने और पानी पिलाने के समय भी वह दोनों पर नजर रखता था। जब दूसरे बाघ या बाघिन दोनों शावकों पर हमला करने आते थे, तो डॉलर मेल उन्हें बचाता था। इतना ही नहीं, उसने दोनों शावकों को शिकार करने के तरीके भी सिखाए। दोनों बड़े होने के बाद कचीदा क्षेत्र से लेकर झरोखा क्षेत्र तक घूमने लगीं। बाद में दोनों को 2014 में सरिस्का भेज दिया गया था। 15 साल की उम्र में मौत; खोपड़ी टूटी मिली थी डॉलर की मौत जनवरी 2020 में रणथंभौर के सांवटा क्षेत्र के पास एक दूसरे युवा नर बाघ T-66 के साथ हुए टेरिटोरियल फाइट में हुई थी। पोस्टमॉर्टम के दौरान उसके सिर की हड्डियां टूटी हुई पाई गई थीं। उसकी उम्र मौत के समय करीब 15 साल थी। मां बनकर नन्हीं मेल टाइग्रेस को संभाला DFO बोले- बाघ ने अपना नेचर बदला रणथंभौर टाइगर रिजर्व फर्स्ट के डीएफओ मानस सिंह बताते हैं कि टाइगर एक टेरिटरी इंडिविजुअल सोलिटरी एनिमल है, जो कि ढाई-तीन साल बाद अपने बच्चों से ज्यादा वास्ता नहीं रखते हैं। अपने ही मां बाप के साथ टेरिटरी के लिए झगड़ते हैं। इसके उदाहरण मछली, ऐरोहेड और रिद्धि हैं। डॉलर का केस अपने आप में अलग उदाहरण है‌। जब उसने 3 माह के फिमेल शावकों को पाला और उन्हें अन्य जानवर से बचाया। वह इन फीमेल शावकों के साथ तब रहा, जब तक वह फीमेल शावक सरिस्का नहीं चले गए। …. टाइगर से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए… एक-दूसरे को मार रहे बाघ-बाघिन:मां से अलग होते ही हो जाते हैं हमलावर, 9 साल में 9 की मौत, जानें- क्या है कारण राजस्थान के रणथंभौर टाइगर रिजर्व में अब बाघों के लिए 'घर' छोटा पड़ने लगा है। अपनी सल्तनत (टेरिटरी) कायम करने की होड़ में बाघ एक-दूसरे के खून के प्यासे हो रहे हैं। पढें ये खबर भी…