विश्व पृथ्वी दिवस के अवसर पर बुधवार को इंटेक उदयपुर चैप्टर के सदस्यों ने जल वैज्ञानिक प्रदीप कोठारी के नेतृत्व में राजस्थान स्टेट माइन्स एंड मिनरल्स की झामर कोटड़ा रॉक फास्फेट माइंस का भ्रमण किया। इस दौरान पर्यावरणविदों ने खनन और पारिस्थितिक संतुलन को लेकर सवाल उठाए और प्राकृतिक संसाधनों के जिम्मेदार उपयोग पर चर्चा की। भ्रमण के दौरान पर्यावरणविद महेश शर्मा ने अंतरराष्ट्रीय शोधों का हवाला देते हुए गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि पूर्व में मटून और कानपुर माइंस के मलबे ने आयड़ नदी के जरिए उदयसागर झील को उथला कर दिया है। अब झामर कोटड़ा खदानों से निकलने वाला करोड़ों टन ओवर बर्डन (मलबा) झामरी नदी के माध्यम से जयसमंद झील को प्रदूषित कर रहा है। सवालों का जवाब देते हुए प्रदीप कोठारी ने बताया कि कानपुर और मटून माइंस बंद की जा चुकी हैं। झामर कोटड़ा में प्रदूषण रोकने के लिए मलबे के पहाड़ों के नीचे वाटर चैनल और झामरी नदी पर चेक डैम बनाए गए हैं। प्रबंधन अब जीरो वेस्ट योजना पर काम कर रहा है, जिसके तहत मलबे से एम-सैंड बनाई जा रही है और खनन के दौरान निकले पानी को शुद्ध कर उपयोग किया जा रहा है। इस दौरान महीप भटनागर, मुनीश गोयल, गौरव सिंघवी और सूरज सोनी ने भी सतत खनन के सुझाव दिए।