अंतरराष्ट्रीय एनिमेशन दिवस के अवसर पर बुधवार को राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर (आरआईसी) में राजस्थान एवीजीसी-एक्सआर समिट 2026 का आयोजन हुआ। इस दौरान समिट में कॉमिक्स, स्टोरी राईटिंग और एनिमेशन फिल्म निर्माण से जुड़ी मास्टरक्लास आयोजित की गईं राइजिंग एवीजीसी-एक्सआर एंड मीडिया एसोसिएशन (रामा राजस्थान) की ओर से आयोजित इस समिट में एनिमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग, कॉमिक्स और एक्सटेंडेड रियलिटी के क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों, कलाकारों, क्रिएटर्स और स्टूडेंट्स ने रचनात्मक उद्योगों की संभावनाओं पर चर्चा की। इस बार समिट की थीम ‘वीविंग द ऑरेंज इकोनॉमी’ रही। समिट के मुख्य वक्ता और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिएटिव टेक्नोलॉजी (आईआईसीटी), मुंबई के संस्थापक निदेशक आशीष कुलकर्णी ने कहा- राजस्थान में दुनिया की क्रिएटिव कैपिटल बनने की पूरी क्षमता है। इसके लिए सरकार, शैक्षणिक संस्थानों और उद्योग जगत के बीच मजबूत सहयोग जरूरी है। उन्होंने कहा कि भारत का एवीजीसी-एक्सआर इकोसिस्टम तेजी से आगे बढ़ रहा है और सरकार समर्थित करीब एक अरब डॉलर की प्रतिबद्धताएं इस क्षेत्र को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण हैं। इससे भारत की वैश्विक सॉफ्ट पावर को बढ़ावा देने और ‘क्रिएट इन इंडिया’ की सोच को अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने में मदद मिल सकती है। यहां देखिए इवेंट के फोटोज… भारतीय कहानियों और किरदारों में वैश्विक पहचान बनाने की क्षमता राज कॉमिक्स के संस्थापक संजय गुप्ता ने भारतीय रचनात्मक उद्योगों में मौलिक कहानियों और सांस्कृतिक किरदारों की भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय सांस्कृतिक बौद्धिक संपदा (आईपी) में केवल मनोरंजन उद्योग ही नहीं, बल्कि कई अन्य रचनात्मक क्षेत्रों का भविष्य बदलने की क्षमता है। उन्होंने युवा क्रिएटर्स को सलाह दी कि वे कला, कहानी कहने की शैली और मौलिक विचारों पर गंभीरता से काम करें। किसी भी प्रतिष्ठित किरदार या रचनात्मक ब्रांड की शुरुआत एक मौलिक विचार से होती है। उन्होंने कहा- यदि कहानी में दम हो और किरदार दर्शकों से जुड़ सकें तो वे पीढ़ियों तक अपनी पहचान बनाए रख सकते हैं। भारतीय रचनाकारों के पास अपनी सांस्कृतिक विरासत से ऐसी कहानियां विकसित करने का बड़ा अवसर है, जिन्हें दुनिया भर के दर्शकों तक पहुंचाया जा सकता है। स्वतंत्र एनिमेशन फिल्ममेकर की यात्रा से मिली सीख स्वतंत्र फिल्ममेकर और वैभव स्टूडियोज के संस्थापक वैभव कुमारेश ने अपनी एनिमेशन फिल्म ‘रिटर्न ऑफ द जंगल’ के निर्माण की यात्रा साझा की। उन्होंने बताया कि स्वतंत्र फिल्मकार भी अपने विचार, रचनात्मकता और दृढ़ संकल्प के दम पर फीचर-लेंथ एनिमेशन फिल्म बनाकर उसे सिनेमाघरों और दुनिया भर के दर्शकों तक पहुंचा सकते हैं। उन्होंने कहा कि किसी बड़े स्टूडियो का समर्थन न होने के बावजूद एक मजबूत कहानी को बड़े पर्दे तक ले जाना संभव है। इसके लिए समय, संसाधनों और अपनी रचनात्मक सोच में निवेश करने की इच्छा जरूरी है। राजस्थान में ही विकसित हो क्रिएटिव इंडस्ट्री का पूरा इकोसिस्टम रामा के सह-संस्थापक एवं संयोजक नितिन जैन ने कहा कि राजस्थान का उद्देश्य केवल यहां की प्रतिभाओं को दूसरे शहरों में अवसर दिलाना नहीं, बल्कि प्रदेश को ऐसा रचनात्मक केंद्र बनाना है, जहां प्रतिभा, निवेश और उद्योग एक साथ विकसित हों। इससे स्थानीय क्रिएटर्स को अपने ही प्रदेश में काम करने, मौलिक कंटेंट तैयार करने और नए उद्यम शुरू करने के अवसर मिल सकेंगे। उन्होंने कहा कि रचनात्मकता की कोई उम्र नहीं होती। आठ साल के जेन अल्फा वर्ग के बच्चे से लेकर 80 साल की उम्र के क्रिएटर तक, हर व्यक्ति के पास अपनी कहानी और विचार साझा करने की क्षमता है। मास्टरक्लास और नए क्रिएटिव प्रोजेक्ट रहे आकर्षण समिट में कॉमिक्स, स्टोरी राईटिंग और एनिमेशन फिल्म निर्माण से जुड़ी मास्टरक्लास आयोजित की गईं। राज कॉमिक्स के संस्थापक संजय गुप्ता और अल्फा कॉमिक्स के संस्थापक-अध्यक्ष वासु गुप्ता ने कॉमिक्स की बदलती दुनिया और भारतीय किरदारों की संभावनाओं पर चर्चा की। लेखक दिव्य प्रकाश दुबे ने कहानी कहने की कला से जुड़े पहलुओं पर विचार साझा किए, जबकि वैभव कुमारेश ने स्वतंत्र एनिमेशन फिल्म निर्माण के अनुभव बताए। कार्यक्रम में तीन नए क्रिएटिव आईपी और प्लेटफॉर्म भी प्रस्तुत किए गए। तत्वार्थ कला और दिव्यांश कला की ओर से ‘कठपुतली: टॉयज एंड टेल्स ऑफ इंडिया’ के जरिए राजस्थान की पारंपरिक कठपुतली कला को नए स्वरूप में प्रस्तुत करने की पहल की गई। इसके अलावा अंकुश नागपाल का शिफ्ट फेस्टिवल और स्टेज ओटीटी के सह-संस्थापक एवं सीओओ परवीन सिंघल का एआई आधारित फिल्म निर्माण प्लेटफॉर्म ‘कट.स्टेज’ भी आयोजन के प्रमुख आकर्षणों में शामिल रहे। रामा अवॉर्ड्स में रचनात्मक प्रतिभाओं का सम्मान समिट के दौरान एवीजीसी-एक्सआर और रचनात्मक अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में योगदान देने वाली हस्तियों को रामा अवॉर्ड्स 2026 से सम्मानित किया गया। डॉ. ललित के. पंवार को संरक्षक सम्मान, आशीष कुलकर्णी को लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड, डॉ. जितेन्द्र शर्मा को मेंटर अवॉर्ड और अमन गुप्ता को यंग अचीवर अवॉर्ड प्रदान किया गया।