पंचायत चुनावों की तैयारियों के बीच विद्यार्थियों की प्रतिभा निखारने वाली सृजनात्मक प्रतियोगिताओं का कार्यक्रम जारी होने से शिक्षा विभाग के सामने व्यवस्थागत चुनौती खड़ी हो गई है। एक ओर शिक्षकों को पंचायत चुनावों में विभिन्न जिम्मेदारियां निभानी हैं, वहीं दूसरी ओर विद्यार्थियों की प्रतियोगिताओं के सफल आयोजन की जिम्मेदारी भी विद्यालयों पर रहेगी। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब पंचायत चुनावों का कार्यक्रम पहले ही घोषित हो चुका था, तो प्रतियोगिताओं की तारीखें तय करते समय चुनावी व्यस्तताओं का आकलन क्यों नहीं किया गया? माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, राजस्थान, अजमेर की ओर से 14 अक्टूबर को जारी कार्यक्रम के अनुसार ब्लॉक स्तरीय सृजनात्मक प्रतियोगिताएं 16 से 24 अक्टूबर तक और जिला स्तरीय प्रतियोगिताएं 2 से 4 नवंबर तक आयोजित की जाएंगी। चुनावी गतिविधियों के बीच इन तारीखों पर प्रतियोगिताओं की तैयारी, आयोजन और नियमित शैक्षणिक कार्यों के बीच तालमेल बैठाना विद्यालयों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। एक ही शिक्षक पर दोहरी जिम्मेदारी की आशंका बोर्ड की सृजनात्मक प्रतियोगिताओं में निबंध लेखन, आशुभाषण, क्विज, चित्रकला और एकल गीत जैसी गतिविधियां शामिल हैं। इनके सफल आयोजन के लिए शिक्षकों की सक्रिय भागीदारी जरूरी है। विद्यार्थियों की तैयारी से लेकर प्रतियोगिताओं के संचालन और अन्य व्यवस्थाओं तक विद्यालय स्टाफ की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। दूसरी ओर, पंचायत चुनावों के दौरान शिक्षकों को मतदान सहित चुनाव प्रक्रिया से जुड़े विभिन्न कार्यों में लगाया जाता है। ऐसे में यदि प्रतियोगिताओं और चुनावी ड्यूटी की तारीखों में टकराव होता है, तो विद्यालयों के सामने स्टाफ की उपलब्धता और आयोजन व्यवस्था को लेकर परेशानी आ सकती है। हालांकि, सभी शिक्षकों की चुनावी ड्यूटी नहीं लगने के कारण उपलब्ध स्टाफ के सहयोग से प्रतियोगिताओं का आयोजन संभव है। इसके लिए पहले से स्पष्ट कार्ययोजना और बेहतर समन्वय जरूरी होगा, ताकि विद्यार्थियों की भागीदारी प्रभावित न हो। पहले समन्वय होता तो टल सकती थी उलझन प्रतियोगिताओं का कार्यक्रम पंचायत चुनावों की तारीखें घोषित होने के बाद जारी किया गया है। ऐसे में कार्यक्रम तैयार करते समय चुनावी कैलेंडर, शिक्षकों की संभावित तैनाती और विद्यालयों की व्यस्तताओं का आकलन किया जा सकता था। इससे ऐसी तारीखें तय करने में मदद मिलती, जिनमें दोनों गतिविधियों के टकराव की आशंका कम रहती। अब कार्यक्रम जारी होने के बाद विद्यालयों को उपलब्ध स्टाफ और संसाधनों के बीच प्रतियोगिताओं का आयोजन सुनिश्चित करना होगा। वास्तविक परेशानी कितने विद्यालयों में आएगी, यह शिक्षकों की चुनावी तैनाती और उपलब्धता पर निर्भर करेगा। इसके बावजूद समय रहते विभागीय समन्वय से व्यवस्थागत कठिनाइयों को कम किया जा सकता है। कार्यक्रमों में समन्वय जरूरी: मोहर सिंह सलावद शिक्षक संघ एलीमेंट्री सेकेंडरी टीचर एसोसिएशन (रेसटा), राजस्थान के प्रदेशाध्यक्ष मोहर सिंह सलावद ने कहा कि पंचायत चुनावों की तारीखें पहले से घोषित होने के बावजूद प्रतियोगिताओं का कार्यक्रम चुनावी अवधि में निर्धारित होना विभागीय समन्वय की आवश्यकता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की सृजनात्मक प्रतिभा को निखारने वाली प्रतियोगिताएं महत्वपूर्ण हैं, इसलिए इनके आयोजन में किसी प्रकार की बाधा नहीं आनी चाहिए। बोर्ड और शिक्षा विभाग को चुनावी कैलेंडर तथा शिक्षकों की संभावित ड्यूटी को ध्यान में रखकर कार्यक्रम तय करने चाहिए। आवश्यकता होने पर तारीखों में व्यावहारिक संशोधन पर भी विचार किया जाना चाहिए, ताकि चुनावी जिम्मेदारियों और शैक्षणिक गतिविधियों का संचालन सुचारु रूप से हो सके।