राजस्थान में फर्जी FMGE (फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्जामिनेशन) सर्टिफिकेट के जरिए मेडिकल इंटर्नशिप और रजिस्ट्रेशन कराने के मामले में स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने एक और आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी राकेश कुमार यादव ने विदेश से MBBS की पढ़ाई की थी, लेकिन भारत में मेडिकल प्रैक्टिस के लिए जरूरी FMGE स्क्रीनिंग परीक्षा पास नहीं कर पाया। इसके बावजूद उसने कथित तौर पर 22 लाख रुपए देकर दिसंबर 2023 की परीक्षा का फर्जी सर्टिफिकेट बनवाया और उसके आधार पर राजस्थान मेडिकल काउंसिल में इंटर्नशिप के लिए आवेदन किया। ताजिकिस्तान से किया MBBS, तीन बार परीक्षा में हुआ असफल आईजी SOG अजपाल लांबा ने बताया कि आरोपी राकेश कुमार यादव (32) पुत्र दलीप सिंह, कोटपूतली-बहरोड़ जिले के बानसूर क्षेत्र स्थित उधों का बास का निवासी है। उसने वर्ष 2011 में 12वीं पास करने के बाद जयपुर के एक नर्सिंग कॉलेज से चार साल का GNM कोर्स किया। इसके बाद वर्ष 2017 में उसने MBBS की पढ़ाई के लिए ताजिकिस्तान के अविसेना मेडिकल कॉलेज में प्रवेश लिया। वर्ष 2017 से 2022 तक पढ़ाई करने के बाद वह भारत लौट आया। भारत में मेडिकल प्रैक्टिस करने के लिए उसने दिसंबर 2022, जून 2023 और दिसंबर 2023 में राष्ट्रीय चिकित्सा विज्ञान परीक्षा बोर्ड, नई दिल्ली की ओर से आयोजित FMGE स्क्रीनिंग परीक्षा दी, लेकिन तीनों बार फेल हो गया। 22 लाख रुपए देकर बनवाया फर्जी सर्टिफिकेट जांच के मुताबिक, परीक्षा में लगातार फेल होने के बाद राकेश ने अलवर निवासी नफीस खान और दौसा निवासी शुभम गुर्जर से संपर्क किया। आरोप है कि दिसंबर 2023 की FMGE परीक्षा का फर्जी प्रमाण पत्र बनवाने के लिए उसने 22 लाख रुपए दिए। इस प्रमाण पत्र के आधार पर उसने राजस्थान मेडिकल काउंसिल में इंटर्नशिप के लिए आवेदन किया। उसे राजकीय मेडिकल कॉलेज, दौसा आवंटित हुआ, जहां उसने इंटर्नशिप शुरू कर दी। इसके बाद उसने प्रोविजनल रजिस्ट्रेशन के लिए राजस्थान मेडिकल काउंसिल, जयपुर में आवेदन किया। फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर इंटर्नशिप करने की खबरें सामने आने के बाद आरोपी ने इंटर्नशिप छोड़ दी। प्रति व्यक्ति 20 से 30 लाख रुपए लेने का आरोप आरोप है की इस पूरे मामले में आरोपी भानाराम माली और उसके साथ काम करने वाले शुभम गुर्जर, इंद्रराज गुर्जर सहित अन्य लोगों ने फर्जी FMGE प्रमाण पत्र बनवाने और राजस्थान मेडिकल काउंसिल में रजिस्ट्रेशन कराने के बदले प्रति व्यक्ति 20 से 30 लाख रुपए लिए। इस मामले में आरोपी शुभम गुर्जर गिरफ्तार हो चुका है, जबकि नफीस खान फरार चल रहा है। पुलिस के मुताबिक, नफीस खान ने भी कथित तौर पर फर्जी FMGE प्रमाण पत्र बनवाकर इंटर्नशिप की थी। SOG ने इस तरह के फर्जी प्रमाण पत्र बनवाने वाले 100 से अधिक विदेशी MBBS डिग्रीधारकों को चिह्नित किया है। मामले में राजस्थान मेडिकल काउंसिल के तत्कालीन रजिस्ट्रार सहित कुल 37 आरोपियों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। रजिस्ट्रार सहित कई आरोपी पहले हो चुके गिरफ्तार एसपी एसओजी सतनाम सिंह ने बताया कि इस मामले में विदेश से MBBS करने वाले 32 डॉक्टरों, राजस्थान मेडिकल काउंसिल के तत्कालीन रजिस्ट्रार डॉ. राजेश शर्मा, UDC अखिलेश माथुर, LDC फरहान हुसैन और मुख्य आरोपी भानाराम माली सहित एक दलाल को पहले गिरफ्तार किया जा चुका है। डीएसपी जितेंद्र नावड़िया ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी राकेश कुमार यादव से पूछताछ जारी है। जांच में फर्जी प्रमाण पत्र बनवाने, इंटर्नशिप करने और मेडिकल काउंसिल में रजिस्ट्रेशन कराने में शामिल अन्य लोगों की भूमिका भी खंगाली जा रही है।