राजस्थान निदेशालय गोपालन ने गौ-संरक्षण को वैश्विक मंच पर नई पहचान दिलाते हुए एक ऐतिहासिक उपलब्धि अपने नाम की है। भरतपुर के जडखोर गौशाला में आयोजित 10,000 से ज्यादा गायों के सामूहिक पूजन कार्यक्रम को 'मल्टीनेशनल बुक ऑफ रिकॉर्ड्स' (लंदन, यू.के.) ने आधिकारिक रूप से ‘न्यू वर्ल्ड रिकॉर्ड’ के रूप में मान्यता दी है। गौरतलब है कि यह आयोजन जडखोर, भरतपुर में आयोजित हुआ था, जहां एक ही जगह और समय पर 10 हजार से ज्यादा गायों का विधि-विधान से सामूहिक पूजन किया गया। गहन सत्यापन और समीक्षा के बाद लंदन स्थित रिकॉर्ड संस्था ने इसे विश्व रिकॉर्ड घोषित किया। गौ-सेवा की परंपरा को वैश्विक सम्मान प्रमुख शासन सचिव विकास सीताराम भाले ने इस उपलब्धि पर खुशी जताते हुए कहा कि यह कीर्तिमान राजस्थान की समृद्ध गौ-सेवा परंपरा, आध्यात्मिक निष्ठा और सांस्कृतिक विरासत का वैश्विक प्रतिबिंब है। उन्होंने कहा कि यह रिकॉर्ड केवल संख्या नहीं, बल्कि गौ-संरक्षण, सांस्कृतिक विरासत और सामूहिक भागीदारी का उत्कृष्ट उदाहरण है। भारतीय संस्कृति और सामाजिक चेतना का संदेश निदेशक पंकज ओझा ने बताया कि ऐसे आयोजनों से गौ-संस्कृति को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने में मदद मिलती है। साथ ही यह आयोजन समाज में गौ-वंश संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने और नई पीढ़ी तक भारतीय संस्कार पहुंचाने का प्रभावी माध्यम बना है। कार्यक्रम के दौरान निदेशक स्वयं मौजूद रहे और पूजा-अर्चना कर गौ-माता का आशीर्वाद लिया। प्रमुख शासन सचिव ने इस उपलब्धि का श्रेय मुख्यमंत्री, विभागीय मंत्रियों, अधिकारियों और गौ-भक्तों की सामूहिक मेहनत को दिया। उन्होंने विश्वास जताया कि यह सम्मान राजस्थान में गौशालाओं के सुदृढ़ीकरण और गौ-वंश कल्याण के कार्यों को नई ऊर्जा देगा। 'मल्टीनेशनल बुक ऑफ रिकॉर्ड्स' के एमडी धर्मेंद्र पाठक और सीईओ कृष्ण कुमार उपाध्याय द्वारा हस्ताक्षरित यह अवॉर्ड अब राजस्थान की प्रशासनिक और सांस्कृतिक उपलब्धियों में एक नया गौरवशाली अध्याय बन गया है।