राजस्थान हाईकोर्ट जोधपुर मुख्यपीठ ने शिक्षा विभाग में भर्ती और नियुक्ति से जुड़े विवादों में कोर्ट के आदेशों की लगातार अनदेखी पर नाराजगी जताई है। जस्टिस रेखा बोराणा ने इस मामले में सरकार को फटकार लगाते हुए वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ सख्त रूख अपनाया है। कोर्ट ने प्रारंभिक शिक्षा भर्ती संबंधित एक अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए शिक्षा विभाग और कर्मचारी चयन बोर्ड के अधिकारियों को कड़ी चेतावनी दी है। जस्टिस बोराणा ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि यदि आगामी तीन सप्ताह में मूल आदेश की पूर्ण अनुपालना रिपोर्ट पेश नहीं की गई, तो संबंधित अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में हाजिर होना होगा। भर्ती विवाद में कोर्ट ऑर्डर की दो साल से अनदेखी याचिकाकर्ता पूर्णिमा कंवर चौहान व अन्य ने हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर कर बताया था कि कोर्ट द्वारा 8 फरवरी 2024 को एक अहम आदेश पारित किया गया था, लेकिन अधिकारियों द्वारा लंबे समय से उसकी पालना नहीं की जा रही है। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता उमेश चंद्र शर्मा (वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए) और अधिवक्ता वीएलएस राजपुरोहित ने पक्ष रखते हुए कोर्ट को बताया कि बार-बार अवसर दिए जाने के बावजूद सरकार की ओर से अनुपालना में टालमटोल की जा रही है। पेश किए गए जवाब को नहीं माना अनुपालना सुनवाई के दौरान कोर्ट ने रिकॉर्ड पर लिया कि प्रतिवादियों को नोटिस की तामील होने के बावजूद उनकी ओर से कोई वकील पेश नहीं हुआ। प्रतिवादी संख्या 1 और 3 की ओर से पेश किए गए जवाब का अवलोकन करने के बाद जस्टिस रेखा बोराणा ने कड़ी टिप्पणी की। अदालत ने माना कि अधिकारियों द्वारा फाइल किया गया जवाब 8 फरवरी 2024 के मूल आदेश की अनुपालना की श्रेणी में नहीं आता है। कोर्ट ने इसे अदालती आदेशों की प्रभावी पालना में विफलता माना और अधिकारियों के टालमटोल वाले रवैये पर नाराजगी जताई। तीन सप्ताह में रिपोर्ट नहीं तो हाजिर हों अधिकारी कोर्ट ने अधिकारियों को अपनी स्थिति सुधारने के लिए तीन सप्ताह का अंतिम अवसर दिया है। कोर्ट ने आदेश में साफ लिखा है कि यदि अगली सुनवाई तक अनुपालना रिपोर्ट या संतोषजनक जवाब पेश नहीं किया गया, तो प्रारंभिक शिक्षा निदेशक (बीकानेर) और राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड (जयपुर) के सचिव को हर हाल में व्यक्तिगत रूप से अदालत के समक्ष उपस्थित रहना होगा।