राजस्थान हाईकोर्ट जोधपुर मुख्यपीठ ने 13 साल से अलग रह रहे पति-पत्नी की शादी को भंग कर दिया है। वहीं पति की ओर से विदेशी अदालत से पत्नी की जानकारी के बिना एक तरफा तलाक लेने को स्पष्ट रूप से मानसिक क्रूरता माना है। जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस सुनील बेनीवाल की खंडपीठ ने कहा कि जो शादी पूरी तरह से टूट चुकी हो, उसे कानूनी आदेशों के जरिए जबरन बनाए रखना दोनों पक्षों के साथ क्रूरता होगी। याचिकाकर्ता महिला की ओर से एडवोकेट परवेज खान और उसके एनआरआई पति की ओर से अमन विश्नोई ने पैरवी की। पढ़िए- क्या है मामला पति ने 5 लाख रुपए लेकर अमेरिका बुलाया, मारपीट की अपील करने वाली बीकानेर निवासी 36 साल की महिला ने कोर्ट में बताया कि उसकी शादी 27 मई 2010 को जयपुर के रहने वाले एक व्यक्ति के साथ हिंदू रीति-रिवाजों के साथ हुई थी। शादी के कुछ समय बाद पति अमेरिका चला गया। महिला के अनुसार- उसके पिता ने पांच लाख रुपए का दहेज दिया, उसके बाद ही पति ने उसे अमेरिका बुलाया। पत्नी का आरोप है कि अमेरिका में पति ने उसके साथ मारपीट की। उसे मानसिक प्रताड़ना दी गई। तब पति का किसी अन्य महिला के साथ अवैध संबंधों का भी पता चला। प्रताड़ना के बाद साल 2013 में वह अमेरिकी पुलिस की सहायता से अपने नाबालिग बेटे को लेकर भारत लौट आई। तब से बीकानेर में अलग रह रही है। भारत लौटने के बाद उसने अपने पति के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज करवाए और भरण-पोषण की कानूनी लड़ाई शुरू की। कोर्ट के आदेश की अवहेलना पर पति को भगोड़ा घोषित किया महिला ने कोर्ट को बताया कि उसके भारत लौटने के बाद पति ने उसे वापस ले जाने या भारत आकर सुलह करने का कोई ठोस प्रयास नहीं किया। इसके बजाय साल 2015 में कैलिफोर्निया की सुपीरियर कोर्ट से एक तरफा तलाक की डिक्री और नाबालिग बेटे की कस्टडी हासिल कर ली। इस विदेशी तलाक की जानकारी उसे तीन साल बाद 2018 में मिली। इधर, भारत में कोर्ट ने पति को पत्नी के लिए प्रतिमाह एक लाख रुपए भरण-पोषण देने का आदेश दिया था। इसके बाद भी पति ने मई 2022 के बाद से एक भी रुपए का भुगतान नहीं किया। भारतीय अदालतों के आदेशों की लगातार अवहेलना करने पर उसे भगोड़ा घोषित किया गया और उसका पासपोर्ट भी जब्त (अमान्य घोषित किया जाना) कर लिया गया, इसके बावजूद वह अमेरिका में ही बैठा रहा। कोर्ट में कब क्या हुआ फैमिली कोर्ट ने महिला की याचिका खारिज की, तब हाईकोर्ट गई महिला ने कोर्ट ने बताया कि विदेशी तलाक का पता चलने के बाद उसने 2019 में बीकानेर के पारिवारिक न्यायालय में तलाक की याचिका दायर की। 17 नवंबर 2021 को फैमिली कोर्ट ने यह कहते हुए याचिका खारिज कर दी कि क्रूरता के आरोप साबित नहीं हुए हैं। केवल लंबे समय तक अलग रहना तलाक का आधार नहीं हो सकता। इस फैसले के खिलाफ पत्नी ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हाईकोर्ट ने कहा- टूटी शादी जारी रखना भी एक क्रूरता हाईकोर्ट ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के 'समर घोष बनाम जया घोष', 'राकेश रमन बनाम कविता' और 'नवीन कोहली' जैसे ऐतिहासिक निर्णयों का विस्तार से हवाला दिया। अदालत ने कहा कि 13 वर्षों का लंबा अलगाव, कटुतापूर्ण कानूनी लड़ाइयां और पति द्वारा विदेश में तलाक लेना यह साबित करता है कि यह रिश्ता (इर्रिट्रीवेबल ब्रेकडाउन) अब खत्म हो चुका है। खंडपीठ ने कहा कि जब पति ने अमेरिका में तलाक लेकर वैवाहिक बंधन तोड़ने की मंशा जता दी है, तो अब पत्नी को इस बेजान रिश्ते में बांधे रखना उसके साथ मानसिक क्रूरता है। कैलिफोर्निया की अदालत का फैसला भारत में अमान्य इस मामले का सबसे रोचक कानूनी पहलू अमेरिकी अदालत के फैसले की वैधता था। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि कैलिफोर्निया की सुपीरियर कोर्ट की ओर से दी गई तलाक की डिक्री का भारत में कोई कानूनी प्रभाव नहीं है। सीपीसी की धारा 13 और 14 के तहत विदेशी निर्णय की मान्यता के लिए उसकी प्रमाणित प्रति पेश करना अनिवार्य है, जो पति ने नहीं की। इसके अलावा, पत्नी को उस विदेशी अदालत में अपना पक्ष रखने का कोई अवसर नहीं मिला, जो नैसर्गिक न्याय का सीधा उल्लंघन है। इन तमाम तथ्यों और कानूनी पहलुओं का विश्लेषण करते हुए हाईकोर्ट ने अपील को आंशिक रूप से स्वीकार कर लिया और हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13 के तहत विवाह को भंग करने का ऐतिहासिक आदेश पारित किया। नॉलेज बॉक्स: विदेश में बैठे भगोड़े का पासपोर्ट कैसे होता है जब्त? जब कोई आरोपी विदेश में छिपा हो और भारतीय अदालतें उसका पासपोर्ट 'जब्त' करने का आदेश देती हैं, तो इसका अर्थ उसे भौतिक रूप से पुलिस के कब्जे में लेना नहीं होता। दरअसल, पासपोर्ट अधिनियम के तहत क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय सिस्टम में उस पासपोर्ट को 'अमान्य' घोषित कर देता है। इसकी सूचना इमिग्रेशन और इंटरपोल के डेटाबेस में अपडेट हो जाती है, जिसके बाद विदेश में रखा वह पासपोर्ट महज एक 'रद्दी कागज' बन जाता है। इस कानूनी कार्रवाई के बाद भगोड़ा व्यक्ति न तो उस पासपोर्ट पर किसी अन्य देश की यात्रा कर सकता है और न ही विदेश में अपने वर्तमान वीजा का नवीनीकरण करवा सकता है। इस 'डिजिटल जब्ती' का मुख्य उद्देश्य आरोपी को कोर्ट के सामने आत्मसमर्पण करने के लिए मजबूर करना होता है। - निखिल भंडारी, एडवोकेट, राजस्थान हाईकोर्ट, जोधपुर