पांचना बांध से पानी छोड़ने के विवाद के बीच राजस्थान हाईकोर्ट ने अदालती आदेश की पालना नहीं होने पर नाराजगी जताई हैं। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस मनीष शर्मा की खंडपीठ ने सरकार से पूछा है कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी नहरों में पानी क्यों नहीं छोड़ा जा रहा हैं। इस पर सरकार ने अदालती आदेश की पालना के लिए 15 दिन का समय मांगा। कोर्ट ने सरकार को समय देते हुए कहा कि अगर नहरों में पानी नहीं छोड़ा गया तो कलेक्टर और संबंधित अधिकारी 27 जुलाई को कोर्ट में पेश हो जाए। यह निर्देश बेंच ने मंगलवार को विधायक रामकेश मीणा व अन्य की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। पिछले 21 साल से नहीं मिल रहा पानी वकील सारांश सैनी ने कोर्ट को बताया कि पांचना बांध से साल 1987 से 2005 तक कमांड क्षेत्र की नहरों में पानी छोड़ा जा रहा था लेकिन प्रदेश में गुर्जर आंदोलन के बाद उनकी मांगों पर विचार करते हुए सरकार ने नहरों में पानी छोड़ना बंद कर दिया। जिसके कारण साल 2006 से नहरों के अंत में बसे कमांड एरिया के 35 गांवों (मुख्य रूप से मीणा बहुल) के किसानों को सिंचाई का पानी नहीं मिल रहा है। इस मामले को लेकर हाईकोर्ट साल 2020 और इसी साल अप्रेल-मई में नहरों में पानी छोड़ने का आदेश दे चुका हैं लेकिन प्रशासन आदेश की पालना नहीं कर रहा हैं। क्या है पांचना बांध विवाद पांचना बांध विवाद मुख्य रूप से राजस्थान के करौली और सवाई माधोपुर जिलों के 74 गांवों के बीच पानी के बंटवारे को लेकर पिछले 20 सालों से चल रहा हैं। बांध के आस-पास के 39 गांवों (मुख्य रूप से गुर्जर बहुल) का कहना है कि बांध के निर्माण में उनकी जमीनें गईं, इसलिए पहला हक उनका है, उन्हें डर है कि नहरों में पानी छोड़ने से उनके खुद के क्षेत्र में जल संकट गहरा जाएगा। वहीं दूसरी ओर नहरों के अंत में बसे कमांड एरिया के 35 गांवों (मुख्य रूप से मीणा बहुल) के किसानों को 2006 से सिंचाई का पानी नहीं मिल रहा है। उनकी मांग है कि राजस्थान हाईकोर्ट के आदेशानुसार नहरों में तुरंत पानी छोड़ा जाए क्योंकि पानी नहीं मिलने से उन्हें हर साल करोड़ों का नुकसान हो रहा है। पिछले महीने हाईकोर्ट के आदेश के बाद यह मामला गरमा गया था। विवाद को लेकर गुड़ला-पांचना संघर्ष समिति के बैनर तले ग्रामीण धरने पर बैठ गए थे। हालांकि पांच दिन पहले सरकार के आश्वासन के बाद धरना समाप्त हो गया था।