राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष (जिला एवं सेशन न्यायाधीश) देवेन्द्र दीक्षित ने गुरुवार को जिला कारागृह का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि कारागृह का उद्देश्य केवल दंड देना नहीं, बल्कि बंदियों के व्यक्तित्व में सकारात्मक सुधार लाकर उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है। न्यायाधीश दीक्षित ने बंदियों से सीधे संवाद कर उनके लंबित केसों, वकील की उपलब्धता और स्वास्थ्य की जानकारी ली। उन्होंने आश्वस्त किया कि आर्थिक तंगी के कारण किसी को भी न्याय से वंचित नहीं रहने दिया जाएगा और जरूरतमंदों को निशुल्क विधिक सहायता (वकील) दी जाएगी। उन्होंने बंदियों को 'नालसा स्प्रूहा योजना' की जानकारी देते हुए बताया कि जेल में बंद कैदियों व अपराध पीड़ितों के आश्रित भी मुफ्त विधिक सहायता के हकदार हैं। सुरक्षा के दिए निर्देश न्यायाधीश ने जेल की रसोई, भोजन की गुणवत्ता, साफ-सफाई, पेयजल और दवाओं की उपलब्धता की बारीकी से जांच की। उन्होंने जेल उपाधीक्षक बिहारी लाल और जेलर मोहम्मद आरिफ को निर्देश दिए कि बंदियों को गरिमापूर्ण माहौल दें और योग, कौशल विकास, शिक्षा व मानसिक स्वास्थ्य जैसी सुधारात्मक गतिविधियों पर विशेष ध्यान दें। इस दौरान जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव समीक्षा गौतम ने जेल का साप्ताहिक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मयंक पालीवाल, चीफ एलएडीसी राधेश्याम जोगी और अधिकार मित्र सुनीता जोनवाल भी उपस्थित रहे।