भारत सरकार की ओर से घोषित अफीम नीति फसल 2026-27 में पात्रता का दायरा बढ़ाया गया है। इससे 4 हजार से ज्यादा अतिरिक्त किसान अफीम की खेती के लिए लाइसेंस पाने की पात्रता में शामिल हो सकेंगे। पिछले साल करीब 49 हजार काश्तकारों को लाइसेंस दिए गए थे। नई नीति से अफीम की खेती करने के इच्छुक किसानों को मौका मिलने की उम्मीद है। प्रदेश के 9 जिलों के 4 हजार से ज्यादा किसानों को होगा फायदा पात्रता दायरा यानी न्यूनतम औसत उपज के मानदंड तय किए गए हैं। पात्रता का दायरा बढ़ने से प्रदेश के 9 जिलों के 4 हजार अतिरिक्त किसानों को फायदा होगा। उन्हें अफीम खेती के पट्टे आसानी से मिल सकेंगे। केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (CBN), राजस्थान यूनिट के डिप्टी नारकोटिक्स कमिश्नर नरेश बुंदेल ने इसकी जानकारी दी। किसान घर बैठकर कर सकते हैं ऑनलाइन अप्लाई उप नारकोटिक्स आयुक्त नरेश बुंदेल ने कहा कि नीति का उद्देश्य पात्र किसानों को लाभ पहुंचाना, पारदर्शिता बढ़ाना और लाइसेंस प्रक्रिया को सरल बनाना है। किसानों को लाइसेंस के डिवीजन कार्यालय आने की जरूरत नहीं है, किसान घर बैठकर भी ऑनलाइन अप्लाई कर सकता है। पिछले साल 49 हजार से ज्यादा किसानों को मिले थे लाइसेंस पिछले साल के मुकाबले इस बार खेती के क्षेत्रफल में रियायत दी है। इस साल चिरा पद्धति के लिए न्यूनतम 0.10 हेक्टेयर और UPS पद्धति के लिए 0.05 हेक्टेयर क्षेत्र निर्धारित किया गया है। इससे पिछले साल के मुकाबले इस बार 4261 अतिरिक्त किसानों को पट्टे मिलेंगे। राजस्थान यूनिट में पिछले साल 49,142 किसानों को लाइसेंस दिए गए थे। इस बार 53,403 लाइसेंस वितरित किए जाने की संभावना है। पात्र किसानों की जानकारी वेबसाइट और ऑनलाइन पोर्टल पर किसानों द्वारा रजिस्ट्रेशन करवाने के बाद कौन-कौन से किसान अफीम खेती के पात्र है, उनकी सूची निकाली है। पात्र किसानों की जानकारी आधिकारिक वेबसाइट और ऑनलाइन पोर्टल पर उपलब्ध है। किसान वेबसाइट पर जाकर देख सकता है। रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर और ई-मेल पर सूचनाएं भेजी जाएंगी। विभाग ने किसानों से दस्तावेजों का विवरण सही रखने और आधिकारिक माध्यमों से जानकारी हासिल करने की अपील की है। अफीम उत्पादन के मामले में तीन राज्यों में राजस्थान दूसरे नंबर पर उन्होंने बताया कि नीति के तहत लगभग 1.33 लाख किसानों के पात्र होने का अनुमान है, जो पिछले साल से करीब 18 हजार ज्यादा है। अफीम उत्पादन के मामले में तीन राज्यों में राजस्थान दूसरे नंबर पर है। राजस्थान में चित्तौड़, भीलवाड़ा, सलूंबर, झालावाड़, कोटा, बारां, प्रतापगढ़ शाहपुरा जिलों मेंअफीम खेती होती है। चित्तौड़ व भीलवाड़ा में 60% किसान है, जबकि कोटा में 6 हजार किसान है।