नमस्कार राजस्थान यूनिवर्सिटी में कैंटीन बंद हुई तो छात्रनेता ने अनोखा प्रदर्शन कर दिया। करौली में SDM साहिबा ने रिश्वत की बोहनी की तो धरी गईं, RAS में ST टॉपर रही थीं। भरतपुर में डंडामार कॉन्स्टेबल को लाइन हाजिर कर दिया गया है और अलवर के राजगढ़ थाना इंचार्ज ने पुलिसिंग का उजला चेहरा दिखाया। राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में.. 1. राजस्थान यूनिवर्सिटी में 'भद्र' प्रदर्शन अपनी मांगों के लिए आंदोलन करते छात्रों की तस्वीर सोचिए। तोड़फोड़। नारेबाजी। हो-हंगामा। यही सारे ख्याल आते हैं। लेकिन राजस्थान यूनिवर्सिटी में ऐसा कुछ नहीं हुआ। छात्रों ने अनोखा प्रदर्शन किया। यहां कैंटीन बंद है। छात्रों को चाय-नाश्ते में परेशानी हो रही है। कैंटीन की मांग को लेकर छात्रनेता शुभम रेवाड़ के नेतृत्व में VC दफ्तर के सामने चूल्हे पर चाय बनाई गई। बाकी छात्र थाली बजाते रहे। नारा लगाया- वीसी मैडम चाय दो। खाना दो। चाय तैयार हुई तो मिट्टी के कुल्हड़ में परोस कर छात्रनेता वीसी के दफ्तर की ओर चले। आंदोलन के मद्देनजर गेट बंद कर दिया गया था। दरबान ने छात्रनेता को ट्रे में चाय लिए देखा तो दरवाजा खोल दिया। मैडम के रूम की तरफ छात्र चाय लेकर बढ़े तो स्टाफ सकते में। छात्रनेता ने कहा- सर चाय ही है, और कुछ नहीं। कोई हंगामा नहीं। स्टाफ को इतने भद्र और शालीन प्रदर्शन की उम्मीद नहीं थी। 2. टॉपर RAS ने पहली पोस्टिंग में ली रिश्वत बच्चों के माथे पर काजल का टीका लगाया जाता है, ताकि किसी की नजर न लगे। आंखों में काजल लगाने से खूबसूरती बढ़ जाती है। काजल से कालिख भी पोती जा सकती है। करौली के नादौती की SDM काजल ने पहली ही पोस्टिंग में 60 हजार की रिश्वत लेकर खुद के करियर पर कालिख लगा ली। सारे दाग धुल जाते हैं, लेकिन किसी अधिकारी पर एक बार लगा ‘भ्रष्ट’ का ठप्पा कभी नहीं मिटता। चाहे फिर कितना ही बढ़िया काम किया जाए। एसडीएम साहिबा ST वर्ग में RAS टॉपर रही तो पूरे समाज का सिर गर्व से ऊंचा हो गया। अब जॉइन करने के 6 महीने बाद ही ACB के सामने चेहरे पर हवाइयां लेकर बैठी रहीं। रिश्वत का माल जुटाकर कोठियां खरीदी जा सकती हैं। कारें, गहने, साजो-सामान जुटाया जा सकता है। लेकिन उसी पैसे से इज्जत नहीं कमाई जा सकती। अफसर के लिए ईमानदारी ही सबसे बड़ी कमाई है। 3. डंडामार कॉन्स्टेबल को किया लाइन हाजिर अंधेरी रातों में सुनसान राहों पर एक मसीहा निकलता है, जिसे लोग…अनोखे सिंह कहते हैं। अनोखे सिंह भरतपुर पुलिस में कॉन्स्टेबल हैं। रात के वक्त गश्त के दौरान अनोखे सिंह बात नहीं करते। उनका डंडा राहगीरों से बात करता है। सब्जी का ठेला लगाने वाले दो भाइयों से अनोखे सिंह के डंडे ने खूब बातें कीं। दोनों भाई बाइक से ठेले के लिए सब्जियां लेने मंडी जा रहे थे। आधी रात का वक्त था। गश्त पर तैनात अनोखे सिंह ने रोक लिया। पूछा- रात में कहां घूम रहे हो? भाइयों ने कहा- सब्जी लेने मंडी जा रहे हैं। बस इतना सुनते ही अनोखे सिंह वैभव सूर्यवंशी की तर्ज पर डंडा घुमाना शुरू कर दिया। इतना ही नहीं, बाइक का 5200 रुपए का चालान भी काट दिया। दोनों भाई सड़क पर 'ओ मम्मी, ओ पापा' चिल्लाते-कराहते रहे। भाइयों ने समझदारी यह की कि घटना का वीडियो बना लिया। सुबह होते-होते बात उच्च अधिकारियों तक पहुंच गई। 4. चलते-चलते.. सभी पुलिसवालों की वर्दी का रंग तो खाकी ही होता है। लेकिन अपने-अपने जमीर के हिसाब से लोग उसे अलग-अलग रंग में रंग देते हैं। कोई उसे दागदार बना देता है तो कोई उजला। अलवर में भीषण बस हादसा हुआ। बस में ड्राइवर का परिवार भी था। दुर्घटना में ड्राइवर, उसकी पत्नी और एक बच्चे की मौत हो गई। बच गई 2 साल की बेटी रिद्धि। सभी का ध्यान उस भयानक हादसे की ओर था, लेकिन जिसकी दुनिया उजड़ गई, उस मासूम के रुदन को समझा राजगढ़ थाना इंचार्ज राजेश मीणा ने। बच्ची को गोद में उठाकर वे उसे चुप कराने की कोशिश करने लगे। कुरकुरे का पैकेट लाए। फोन में वीडियो दिखाने लगे। बच्ची अपनी मां के पास जाने की बात कहकर रोती रही और SHO साहब उसे बहलाने-चुप कराने की मशक्कत करते रहे। पुलिसिंग का ये भी अनोखा पक्ष है कि किसी का ध्यान खून पर जाता है और किसी का आंसुओं पर। इनपुट सहयोग- साजिद खान (अलवर), गौरव माथुर (भरतपुर), सुमित शर्मा (टोडाभीम, करौली)। वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल मुलाकात होगी