राजस्थान रोडवेज में कंडक्टर की नौकरी मिलने के बाद 19 लोगों ने इस्तीफा दे दिया। इनमें कई ऐसे हैं, जिनका चयन चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी की भर्ती में हो गया। यानी रोडवेज में कंडक्टर की नौकरी मिलने के बाद भी उन्होंने दूसरे पद पर जाने का फैसला किया। कुछ को चिकित्सा विभाग, शिक्षक भर्ती और जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग में नौकरी मिली है। वहीं, कुछ ने पढ़ाई जारी रखने, परिवार और स्वास्थ्य संबंधी कारणों से नौकरी छोड़ दी। रोडवेज ने इन 19 कंडक्टरों के इस्तीफे स्वीकार कर लिए हैं। इनमें अगस्त से अक्टूबर 2026 के बीच नौकरी छोड़ने वाले कर्मचारी शामिल हैं। ये कंडक्टर बाड़मेर, सवाई माधोपुर, डीडवाना, अलवर, श्रीगंगानगर, सीकर, नागौर, झालावाड़, हिंडौन, वैशालीनगर, बारां, टोंक, फलोदी और झुंझुनूं सहित अलग-अलग आगारों में तैनात थे। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी की नौकरी मिली तो रोडवेज छोड़ दी रोडवेज के कई कंडक्टरों का चयन चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भर्ती-2024 में हुआ है। इनमें बाड़मेर आगार की गंगा चौधरी, डीडवाना के संजय कुमार, गंगानगर के केशव, सीकर की मंजू राड और टोंक के बनवारी लाल सैनी शामिल हैं। अलवर आगार के जितेन्द्र का चयन चिकित्सा विभाग में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के पद पर हुआ है। वहीं, नागौर आगार के सुभाष शर्मा को शिक्षक भर्ती में नौकरी मिली है। झुंझुनूं आगार के सुरेन्द्र सिंह का चयन जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग में हुआ है। इन सभी ने दूसरी नौकरी मिलने के बाद रोडवेज से इस्तीफा दे दिया। किसी ने पढ़ाई तो किसी ने निजी कारणों से छोड़ी नौकरी सभी 19 कंडक्टरों ने दूसरी नौकरी मिलने के कारण ही इस्तीफा नहीं दिया। सवाई माधोपुर आगार के हरसहाय मीना ने परिवार की परिस्थितियों और आगे पढ़ाई जारी रखने के लिए नौकरी छोड़ी। टोंक के प्रियांशु कुमार बंसीवाल ने भी आगे की पढ़ाई और दूसरी भर्ती परीक्षाओं की तैयारी के लिए इस्तीफा दिया। अलवर आगार के दीपक धाखड़ और फलोदी के राजेन्द्र ढाका ने स्वास्थ्य संबंधी परेशानी के कारण नौकरी छोड़ी। सीकर की कमलेश कुमारी और नागौर के घनश्याम शर्मा ने व्यक्तिगत और पारिवारिक कारण बताए। झालावाड़ के सौरभदेव राठौड़, वैशालीनगर के विकास कुमार, अंशु सिंघल और बारां के राहुल सहरिया ने भी निजी कारणों से इस्तीफा दिया। हिंडौन के गौरेन्द्र सैनी ने अपनी इच्छा से नौकरी छोड़ी।