रोडवेज कर्मचारियों ने निजीकरण, लंबी ड्यूटी और अन्य मुद्दों को लेकर आज प्रदेशभर में प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने भारतीय मजदूर संघ से जुड़े राजस्थान परिवहन निगम संयुक्त कर्मचारी फेडरेशन के नेतृत्व में अलग-अलग डिपो पर विरोध जताया। जयपुर में सिंधी कैंप बस स्टैंड पर सीबीएस, जयपुर, वैशाली नगर, विद्याधर नगर और डीलक्स डिपो के कर्मचारी एकजुट हुए। प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष ओमवीर शर्मा के नेतृत्व में कर्मचारियों ने नारेबाजी की। फेडरेशन के प्रदेश महामंत्री सत्यनारायण शर्मा ने बताया कि चालक और परिचालकों से 18 से 20 घंटे तक काम लिया जा रहा है, लेकिन ओवरटाइम नहीं दिया जा रहा। 2 से 3 महीने तक साप्ताहिक छुट्टी भी नहीं मिल रही। करीब 150 कर्मचारियों का 5 महीने से वेतन रोका गया है, जिससे कर्मचारियों पर मानसिक दबाव बढ़ रहा है। निजीकरण और सिंधी कैंप से बस संचालन को लेकर सवाल फेडरेशन के पदाधिकारी रमेश साई ने बताया कि रोडवेज में नई बसें खरीदने के बजाय अनुबंधित बसों को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे निजीकरण की स्थिति बन रही है। 200 फीट बस स्टैंड और नारायण सिंह सर्किल से रोडवेज बसों को हटाकर हीरापुरा और ट्रांसपोर्ट नगर से चलाया जा रहा है, जबकि निजी बसें अब भी पुराने स्थानों से संचालित हो रही हैं। सिंधी कैंप पर अवैध बसों को रोकने में भी कार्रवाई नहीं हो रही। महिलाओं को चाइल्ड केयर लीव देने में भेदभाव मनोहर शर्मा ने बताया कि महिलाओं को चाइल्ड केयर लीव देने में भेदभाव किया जा रहा है। वहीं महेंद्र प्रताप ने बताया कि ऑफिस और वित्त विभाग के कर्मचारियों से निरीक्षण का काम लिया जा रहा है, जो गलत है। तकनीकी कर्मचारियों की पदोन्नति और ग्रेड-पे की समस्या भी अभी तक हल नहीं हुई। पदोन्नति और भर्ती मामलों पर भी सवाल फेडरेशन के संरक्षक विनोद कुमार गुप्ता ने बताया कि चालक पद के लिए पदोन्नति का सिस्टम बनाने की मांग लंबे समय से की जा रही है। सहायक यातायात निरीक्षक के पद से जुड़े फैसलों को मंजूरी मिलने के बाद भी आदेश जारी नहीं किए गए। इसके अलावा 2025 में परिचालक वर्ग को छोड़कर बाकी कर्मचारियों की डीपीसी करना भी भेदभाव दर्शाता है। प्रदर्शन के बाद प्रतिनिधिमंडल ने जिला प्रशासन के जरिए मुख्यमंत्री और परिवहन मंत्री के नाम 14 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा और जल्द समाधान नहीं होने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी।