अलवर शहर के पास सरिस्का बफर ज़ोन में वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा हो गया है। जंगल सफारी के नाम पर तैयार किए गए नए रास्ते ने न सिर्फ पर्यावरण बल्कि ऐतिहासिक धरोहर को भी नुकसान पहुंचाया है। यह रास्ता आड़ा पाड़ा से अंधेरी होते हुए सूरजकुंड से सीधे बाला किला क्षेत्र तक बनाया गया है। सबसे गंभीर बात यह है कि इस रास्ते के निर्माण के दौरान हजारों हरे-भरे पेड़ों को काट दिया गया। वहीं करीब 400 साल पुराने बाला किला की मजबूत परकोटा (सुरक्षा दीवार) को भी तोड़ दिया गया, जो अलवर की ऐतिहासिक पहचान का अहम हिस्सा है। स्थानीय लोगों में इसको लेकर भारी नाराजगी है। सुबह घूमने आने वाले लोगों ने वन विभाग के इस फैसले को गलत बताया। उनका कहना है कि जब पहले से जंगल सफारी के लिए रास्ता मौजूद था, तो नया रास्ता बनाने के लिए पेड़ों की कटाई और किले की दीवार तोड़ने की क्या जरूरत थी। इस पूरे मामले को लेकर डॉ. कांति प्रसाद शर्मा ने कड़ा विरोध जताते हुए साफ कहा है कि यह सीधा-सीधा पर्यावरण और धरोहर के साथ खिलवाड़ है। उन्होंने चेतावनी दी है कि वे हाई कोर्ट में रिट याचिका दायर करेंगे। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या वन विभाग पर्यटन को बढ़ावा देने के नाम पर नियमों को दरकिनार कर सकता है? क्या किसी भी कीमत पर विकास के नाम पर इतिहास और प्रकृति को नुकसान पहुंचाना सही है? इस मामले में सीसीएफ संग्राम सिंह ने कहा कि अभी मामले की जानकारी नहीं है। दिखवाकर ही कुछ कह पाएंगे।