राजस्थान में टोल बूथों और हाई-वे के पास संचालित धर्मकांटा (बड़ी गाड़ियों के वजन करने वाले कांटे) पर बड़ी अनियमितताएं मिली है। इन पर बिना सर्टिफाइड करवाए कांटे (वजन नापने की मशीनें) से न केवल बड़े कॉमर्शियल वाहनों का वजन माप रहे है, ​बल्कि उनके आधार पर टोल टैक्स की वसूली की जा रही है। दो दिन (21, 22 अक्टूबर) में उपभोक्ता मामले विभाग के विधिक माप विज्ञान की टीमों ने प्रदेश में ऐसे 380 धर्मकांटों का निरीक्षण किया, जहां टीम को 79 कांटे बिना सर्टिफाइड मिले। टीम ने जिन पर एक्शन लेकर 10.95 लाख रुपए का जुर्माना किया। अभियान के दौरान दौसा जिले के भांडारेज टोल प्लाजा पर बिना वैध सत्यापन के संचालित धर्मकांटे पाए जाने पर विभाग ने सख्त कार्रवाई की। यहां स्थापित 16 धर्मकांटों को जब्त कर लिया गया, ताकि बिना सत्यापन की तौल प्रणाली के माध्यम से आगे किसी भी प्रकार की संभावित अनियमितता को रोका जा सके। इसके अलावा जालोर में भारतमाला एक्सप्रेस-वे पर सांगाणा टोल प्लाजा पर, NH-248A बहला टोल प्लाजा अलवर और टिडियासर टोल प्लाजा NH-11 रतनगढ़ (चूरू) बने कांटे को जब्त करने की कार्रवाई की। वजन से होता है टोल का निर्धारण विभाग के डिप्टी कंट्रोलर आलोक जारवाल ने बताया कि जयपुर-आगरा हाई-वे पर ही भांडारेज टोल बूथ पर लगे 16 धर्मकांटों को जब्त किया गया। यहां बिना सर्टिफाइड वजन तोलने की मशीनें लगा रखी थी। टोल प्लाजा पर भारी वाहनों से लिए जाने वाले टोल शुल्क का निर्धारण वाहन के वजन के आधार पर किया जाता है। ऐसे में यदि तौल उपकरण का वैध सत्यापन नहीं हुआ है, तो उसकी माप की शुद्धता सुनिश्चित नहीं मानी जा सकती। गलत तौल के कारण वाहन का वजन वास्तविक वजन से अधिक दर्ज होने पर निर्धारित शुल्क से अधिक टोल वसूले जाने की आशंका रहती है। इसके अलावा गलत तौल से ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट, मालभाड़े और अन्य वजन आधारित भुगतानों पर भी प्रभाव पड़ता है।