राजसमंद झील में अवैध रूप से मछली पकड़ने का कारोबार चल रहा है। झील में मछली पकड़ना अवैध माना गया है और पिछले कई सालों से यहां मछली पकड़ने के लिए सरकार की ओर से ठेका नहीं दिया गया है। इसके बावजूद मछली माफिया अवैध तरीके से मछलियां पकड़ रहे हैं, जिसपर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। गुरुवार सुबह नौ चौकी स्वीमिंग क्लब के सदस्य झील में तैराकी करने पहुंचे तो वहां अंबामाता गेवर माता मंदिर के पास जाल में मछलियों को तड़पते देखा। इसके बाद सुभाष जांगिड़ और प्रहलाद वैष्णव ने हिम्मत दिखाते हुए ट्यूब की सहायता से पानी में उतरकर रेस्क्यू शुरू किया। जाल में फंसी कई मछलियां जिंदा थीं, जिन्हें सुरक्षित बाहर निकाला गया। यह झील भारत की दूसरी सबसे बड़ी बनावटी झील है। इसके दोनों ओर पवित्र तीर्थ द्वारिकाधीश मंदिर और मां अन्नपूर्णा माताजी का मंदिर स्थित हैं। झील को पुष्कर सरोवर की तरह पवित्र माना जाता है। इसके बावजूद यहां के लोगों की धार्मिक आस्था को नजरअंदाज किया जा रहा है। झील संरक्षण से जुड़े दिनेश श्रीमाली के अनुसार, 1979 से 1980 के बीच झील में मछली पकड़ने का विरोध हुआ था। इस झील में मछलियां पकड़ने से न केवल धार्मिक भावनाएं आहत होती हैं, बल्कि यहां के इकोसिस्टम को भी नुकसान पहुंचता है।