ग्रामीण विद्यार्थियों को गांव के निकट ही गुणवत्तापूर्ण उच्च माध्यमिक शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने पिछले चार वर्षों में राजसमंद जिले के 48 राजकीय विद्यालयों का क्रमोन्नयन कर उन्हें उच्च माध्यमिक स्तर का दर्जा दिया। लेकिन यह फैसला अब तक केवल कागजों तक सीमित है। इन विद्यालयों में आवश्यक व्याख्याताओं, वरिष्ठ अध्यापकों और विषय विशेषज्ञों के पद स्वीकृत नहीं होने से उच्च कक्षाओं की पढ़ाई गंभीर रूप से प्रभावित हो रही है। हालात यह हैं कि 11वीं और 12वीं के विद्यार्थियों को विज्ञान, वाणिज्य और कला संकाय की पढ़ाई विषय विशेषज्ञों के बजाय एल-1, एल-2 और सेकंड ग्रेड शिक्षकों के भरोसे करनी पड़ रही है। कई स्कूलों में एक ही शिक्षक को एक से अधिक विषय पढ़ाने पड़ रहे हैं, जबकि कुछ जगहों पर पड़ोसी विद्यालयों से वैकल्पिक व्यवस्था कर कक्षाएं संचालित कराई जा रही हैं। जिले के खमनोर, देलवाड़ा, भीम, रेलमगरा, देवगढ़, राजसमंद, कुंभलगढ़ और आमेट ब्लॉक के इन 48 विद्यालयों में सबसे अधिक क्रमोन्नयन भीम और खमनोर क्षेत्र में हुआ है। स्थिति यह है कि स्कूलों में आंकड़ों के अनुसार जिले में प्रिंसिपल के कुल 378 पद स्वीकृत हैं, जिनमें से 199 पद रिक्त हैं और केवल 179 पदों पर ही कार्यरत हैं। इसी तरह सभी संकाय में व्याख्याताओं के 1280 स्वीकृत पदों में से 456 पद खाली हैं, जबकि 824 पर ही शिक्षक कार्यरत हैं। सीनियर टीचरों की स्थिति और भी चिंताजनक है, जहां 1989 पदों में से 1278 पद रिक्त हैं और मात्र 711 पद भरे हुए हैं। 26 बालिका विद्यालय भी हुए क्रमोन्नत, लेकिन उद्देश्य अधूरा: 48 में से 26 राजकीय बालिका विद्यालयों को भी उच्च माध्यमिक स्तर पर क्रमोन्नत किया। इनमें खमनोर में 4, देलवाड़ा में 3, भीम में 7, रेलमगरा में 5, देवगढ़ में 1, राजसमंद में 3, कुंभलगढ़ में 2 और आमेट में 1 बालिका विद्यालय शामिल हैं।