बूंदी के रामगढ़-विषधारी टाइगर रिजर्व के कालदां बफर जोन में वन्यजीवों की गतिविधियां तेजी से बढ़ रही हैं। मंगलवार को नीमतलाई गांव के पास दो बघेरों ने बकरियों के झुंड पर हमला कर एक बकरी को मार डाला और दूसरी को गंभीर रूप से घायल कर दिया। इसी क्षेत्र में बाघिन RVT-8 की मौजूदगी और लगातार बढ़ती घटनाओं ने ग्रामीणों और पशुपालकों की चिंता बढ़ा दी है, जबकि वन विभाग की सुस्ती भी सवालों के घेरे में है। बकरियों पर हमला, एक की मौत जानकारी के अनुसार नीमतलाई गांव निवासी रतन लाल भील अपनी बकरियों को लेकर जंगल की ओर जा रहे थे। तभी जंगल किनारे तलहटी में मौजूद दो बघेरों ने अचानक हमला कर दो बकरियों को दबोच लिया। पीछे चल रहे चरवाहे ने हिम्मत दिखाते हुए दौड़कर बकरियों को छुड़ाया, लेकिन तब तक एक बकरी की मौत हो चुकी थी और दूसरी गंभीर रूप से घायल हो गई। वन विभाग पहुंचा, पंचनामा कर जुटाई जानकारी घटना की सूचना मिलते ही गुढ़ानाथावतान नाके का वन स्टाफ मौके पर पहुंचा और पंचनामा बनाकर आवश्यक जानकारी जुटाई। वन विभाग के अनुसार, नियमों के तहत पीड़ित पशुपालक को मुआवजा दिया जाएगा। इलाके में बाघिन RVT-8 की भी मौजूदगी कालदां बफर जोन में इन दिनों बाघिन RVT-8 भी सक्रिय है। ऐसे में बाघ और बघेरों दोनों की आवाजाही ने क्षेत्र को संवेदनशील बना दिया है। वन विभाग ने पशुपालकों को जंगल में पशु न ले जाने की सलाह दी है। शिकार की कमी से बढ़ रहे हमले विशेषज्ञों का मानना है कि तलहटी क्षेत्र में शाकाहारी वन्यजीवों की कमी के चलते बघेरे अब मवेशियों को अपना शिकार बना रहे हैं। यही कारण है कि जंगल से सटे गांवों में हमलों की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। पहले भी हो चुकी है घटना तीन दिन पहले भी इसी इलाके में एक पैंथर ने श्योजी लाल मीणा के पालतू कुत्ते को शिकार बनाने की कोशिश की थी। हालांकि किसान के हस्तक्षेप से कुत्ते की जान बच गई, लेकिन वह घायल हो गया था। वन विभाग की लापरवाही पर सवाल लगातार बढ़ती घटनाओं के बावजूद वन विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं। मंगलवार की घटना में भी मृत बकरी को पंचनामा के बाद मौके पर ही छोड़ दिया गया, जिससे जहर डालकर वन्यजीवों को नुकसान पहुंचाने का खतरा पैदा हो गया। बाद में रेंजर विक्रम हूण की फटकार के बाद वनकर्मी मौके पर पहुंचे और मृत बकरी को हटाया। भविष्य की योजना, लेकिन जमीन पर असर नहीं उपवन संरक्षक आलोक गुप्ता ने हाल ही में क्षेत्र का दौरा कर कालदां को चरणबद्ध तरीके से बाघों के अनुकूल बनाने के निर्देश दिए हैं। हालांकि, अभी तक शिकार आधार बढ़ाने के ठोस प्रयास नहीं दिखे हैं, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष बढ़ने का खतरा बना हुआ है। ग्रामीणों में बढ़ रही दहशत लगातार हो रही घटनाओं से ग्रामीणों और पशुपालकों में डर का माहौल है। पालतू जानवरों की मौत के साथ-साथ वन्यजीवों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ती नजर आ रही है। अब सबकी नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी है।