रणथंभौर नेशनल पार्क में मानसून के बाद फोटो ट्रेप कैमरों से बाघों की गणना होगी। यह गणना लगभग डेढ़ से दो माह चलेगी। इसके लिए वन विभाग 300 पाइंट पर 600 फोटो ट्रेप कैमरे लगाए जाएंगे। उपवन संरक्षक मानस सिंह ने बताया कि रणथंभौर वन क्षेत्र में सामान्य दिनों में यहां 250 से 300 कैमरा ट्रैप हमेशा लगे रहते हैं, ताकि बाघों की लगातार मॉनिटरिंग होती रहे। रणथंभौर में बाघों की संख्या अधिक होने से निगरानी के लिए ज्यादा कैमरों की जरूरत पड़ती है। ऐसे में मानसून के बाद बाघों की गणना को लेकर लगभग 300 पॉइंट्स निर्धारित किए गए, जहां मॉनिटरिंग के लिए दो-दो कैमरे लगाए जाएंगे। ऐसे में 600 कैमरों से बाघों की गणना की जाएगी। डीएफओ ने बताया कि लगभग 4 साल पूर्व राजस्थान के टाइगर रिजर्व में वाटर होल पद्धति से होने वाली गणना बंद कर दी गई थी। अब राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) और वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (डब्ल्यू.आई.आई.) की टाइगर सेल के वैज्ञानिक तरीके से कैमरा ट्रैप के जरिए बाघों की गणना की जाती है। गणना का पूरा डेटा एनटीसीए जारी करेगा। इसमें टाइगर रिजर्व के साथ सोशल फॉरेस्ट्री क्षेत्र में बाघों की आवाजाही का डेटा भी शामिल रहेगा। कैमरा ट्रैप से ली गई तस्वीरों में बाघ के शरीर पर बनी धारियों (स्ट्राइप पैटर्न) के आधार पर उसकी पहचान की जाती है। हर व्यक्ति के फिंगरप्रिंट अलग होते हैं, उसी तरह हर बाघ की धारियों का पैटर्न भी अलग होता है। इसी वजह से प्रत्येक बाघ की अलग-अलग पहचान कर उसकी सटीक गणना की जाती है। जानकारी के अनुसार रणथंभौर टाइगर रिजर्व में पहले सिर्फ 25 टाइगर थे जो संख्या बढ़कर अब 77 हो गई है। रणथंभौर में सिर्फ बाघों की संख्या ही नहीं बढ़ी, बल्कि उन्हें गिनने का तरीका भी पूरी तरह बदल गया। कभी जंगल में पंजों के निशान खोजे जाते थे। वही काम हाई टेक कैमरा ट्रैप कर रहे हैं। 300 प्वाइंट पर 600 ट्रेप कैमरे लगेंगे : डीएफओ ^मानसून के बाद रणथंभौर अभयारण्य में बाघों की गणना होगी। इसके लिए 300 पाइंट पर 600 फोटो ट्रेप कैमरे लगाए जाएंगे। हालांकि पार्क के वन क्षेत्र में सामान्य दिनों में यहां 250 से 300 कैमरा ट्रैप हमेशा लगे रहते हैं, ताकि बाघों की लगातार मॉनिटरिंग होती रहे। - मानस सिंह , डीएफओ प्रथम रणथंभौर सवाईमाधोपुर