डूंगरपुर| जिले में विकास की रफ्तार और जमीनी हकीकत के बीच बड़ा अंतर अब भी साफ नजर आता है। रोजगार, स्वास्थ्य और पेयजल जैसी मूलभूत जरूरतें आज भी बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। जिला परिषद सीईओ हनुमान सिंह राठौड़ ने दैनिक भास्कर से खास बातचीत में स्वीकार किया कि योजनाओं की कमी नहीं, बल्कि उनके क्रियान्वयन की चुनौती सबसे बड़ी है। जनजातीय क्षेत्रों में भौगोलिक बाधाएं विकास की गति को धीमा करती हैं। हालांकि प्रशासन मॉनिटरिंग, पारदर्शिता और रोजगार के अवसर बढ़ाने पर फोकस कर रहा है, लेकिन जमीनी बदलाव के लिए सिस्टम को और मजबूत करने की जरूरत है। Q. जनजातीय क्षेत्र में विकास धीमा क्यों है, क्या पंचायत स्तर पर सही मॉनिटरिंग हो रही है? A. भौगोलिक परिस्थितियां, संचार की कमी और बिखरी आबादी इसकी बड़ी वजह हैं। दुर्गम इलाकों में सड़क, बिजली और पानी जैसी सुविधाएं पहुंचाने में लागत और समय दोनों ज्यादा लगते हैं। ब्लॉक स्तर पर हर सप्ताह बैठक होती है और पंचायत स्तर पर महीने में दो बार समीक्षा होती है। इसके बावजूद कई जगहों पर निगरानी को लेकर सवाल उठते रहे हैं। Q. रोजगार के लिए पलायन बढ़ रहा हैं, इसे कैसे रोकेंगे? A. कौशल विकास, मनरेगा और आजीविका मिशन के जरिए युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ रहे हैं। कई युवा गुजरात और मध्यप्रदेश की ओर पलायन करते हैं। जिला उद्योग केंद्र के जरिए एमओयू किए गए हैं। इससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। इन योजनाओं को धरातल पर लाकर स्थिति में सुधार हो सकता है। Q. आम आदमी अपनी समस्या कैसे पहुंचाए? A. स्टाफ की कमी और कार्यभार के कारण कई बार योजनाओं का असर जमीनी स्तर पर कमजोर दिखता है। सीधे कार्यालय, फोन, ईमेल या राजस्थान संपर्क पोर्टल से संपर्क कर सकते हैं। मौके पर ही समाधान का प्रयास करते हैं, नहीं तो जिला स्तर पर निस्तारण किया जाता है। Q. कई गांवों में आज भी सुविधाएं नहीं हैं, क्या यह विफलता है? A. भौगोलिक परिस्थितियां बड़ी वजह हैं, लेकिन विकसित ग्राम अभियान से सुधार होगा। जिले के कई गांव अब भी सड़क, पानी और स्वास्थ्य जैसी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। शिकायतों की जांच कर पात्र लोगों तक लाभ पहुंचाया जाता है और दोषियों पर कार्रवाई होती है। लाभार्थी चयन को लेकर विवाद और शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं। Q. ग्राम पंचायतों में भ्रष्टाचार या लापरवाही पर हाल में कोई कार्रवाई? A. हर ग्राम पंचायत में प्रभारी अधिकारी नियुक्त किए हैं और नियमित समीक्षा हो रही है। पंचायतों में पारदर्शिता को लेकर अक्सर शिकायतें सामने आती रही हैं, जिन्हें सुधारने की कोशिश जारी है। मनरेगा में अनियमितता पर जांच कर दोषियों पर कार्रवाई और वसूली की प्रक्रिया शुरू की गई है। यह संकेत है कि प्रशासन अब गड़बडिय़ों को लेकर सख्त रुख अपना रहा है। Q. डूंगरपुर जिले की सबसे बड़ी 3 समस्याएं क्या हैं? A. रोजगार, स्वास्थ्य और पेयजल यह तीनों हमारी टॉप प्राथमिकताएं हैं। जिले में रोजगार के सीमित अवसर और पानी की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। इससे ग्रामीण इलाकों में हालात ज्यादा चुनौतीपूर्ण हैं। गर्मी के मौसम में कई गांवों में पेयजल संकट की समस्या प्रमुख रूप से सामने आई है। इससे प्रशासन पर दबाव बढ़ जाता है। योजनाएं बहुत हैं, लेकिन सिस्टम का सही तरीके से काम करना, मॉनिटरिंग और संवाद बेहद जरूरी है। कई बार योजनाएं कागजों में ही सीमित रह जाती हैं, जिनका पूरा लाभ ग्रामीणों तक नहीं पहुंच पाता।