पचपदरा रिफाइनरी में लगी आग ने निर्माण और संचालन की टाइमिंग पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पेट्रोलियम विभाग के अनुसार दिसंबर 2025 तक 90.4% और 20 अप्रैल तक करीब 92% काम ही पूरा हुआ था, जबकि इसी बीच उद्‌घाटन की तैयारी चल रही थी। 2018 में शुरू प्रोजेक्ट को 90% तक पहुंचने में 8 साल लगे। ऐसे में सवाल है कि क्या 9.6% शेष काम और सुरक्षा परीक्षण पूरे किए बिना ही प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। विशेषज्ञों के मुताबिक 90% से 100% का ‘कमीशनिंग फेज’ सबसे संवेदनशील होता है, जहां लीकेज, प्रेशर और सिस्टम फेल होने का खतरा रहता है। दिसंबर तक 9 में से 8 यूनिट्स का मैकेनिकल काम पूरा था, लेकिन सीडीयू यूनिट में पहली बार कच्चा तेल डालने के दौरान जोखिम सबसे ज्यादा होता है। मानक के अनुसार किसी यूनिट को संचालन योग्य तभी माना जाता है, जब वह 72 घंटे तक लगातार बिना रुकावट चले। जबकि आग के समय यूनिट ट्रायल पर थी और 13 में से 4 पेट्रोकेमिकल यूनिट्स अब भी निर्माणाधीन थीं। जिस हिस्से में आग लगी, वह मैकेनिकली तैयार था, लेकिन ऑपरेशन के लिहाज से पूरी तरह सुरक्षित नहीं, यही अब जांच का सबसे बड़ा बिंदु है। वार्निंग सिस्टम साइलेंट, सेंसर भी फेल; जांच कंट्रोल रूम के आखिरी 48 घंटे पर टिकी रिफाइनरी के उद‌्घाटन से महज 20 घंटे पहले लगी आग अब सिर्फ हादसा नहीं, बल्कि संदेहों का केंद्र बन गई है। करोड़ों के हाईटेक सेफ्टी सिस्टम के बावजूद अर्ली वार्निंग का साइलेंट रहना सबसे बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है। NIA ने कंट्रोल रूम के आखिरी 48 घंटे को खंगालना शुरू कर दिया है। फोकस इस पर है कि यह तकनीकी चूक थी या सिस्टम से छेड़छाड़ की गई। एनआईए और गृह मंत्रालय की टीम ने पीएम दौरे से पहले के 48 घंटे की पूरी टाइमलाइन को जांच के केंद्र में रखा है। कंट्रोल रूम के डेटा लॉग, सीसीटीवी फुटेज और यूनिट में एंट्री करने वाले हर व्यक्ति की मूवमेंट का विश्लेषण किया जा रहा है। वहीं, हादसे ने रिफाइनरी के कमर्शियल ऑपरेशन की टाइमलाइन बिगाड़ दी है। 1 जुलाई 2026 से उत्पादन शुरू होना था, लेकिन अब प्रभावित यूनिट को दोबारा खड़ा करने में 4 से 6 महीने लग सकते हैं। पहले ही 79,450 करोड़ तक पहुंच चुकी परियोजना लागत में और बढ़ोतरी तय मानी जा रही है। एनआईए का फोकस ऑटोमेटिक स्प्रिंकलर... हादसे के वक्त क्रूड डिस्टिलेशन यूनिट के पास लगे सेंसर ने समय पर सिग्नल नहीं दिया। गैस रिसाव होते ही अलार्म बजना और ऑटोमेटिक स्प्रिंकलर एक्टिव होना चाहिए था, लेकिन सिस्टम साइलेंट रहा। स्प्रिंकलर चालू हुए, लेकिन सेंसर से अलर्ट नहीं मिला। फायर सप्रेशन सिस्टम रिफाइनरी में लगे ऑटोमेटिक फायर सप्रेशन सिस्टम और सुरक्षा सेंसर अब जांच के घेरे में हैं। सेंट्रल फॉर हाई टेक्नोलॉजी के विशेषज्ञ पूरे सिस्टम का तकनीकी ऑडिट करेंगे। अर्ली वार्निंग सिस्टम रिफाइनरी हादसे में सबसे गंभीर पहलू अर्ली वार्निंग सिस्टम का फेल होना सामने आया है। तकनीकी रूप से गैस रिसाव होते ही सेकंडों में अलार्म बजना और फायर सप्रेशन सिस्टम एक्टिव होना चाहिए था, लेकिन मौके पर ऐसा नहीं हुआ। PM मंच तक पहुंचा था युवक, सुरक्षा चूक में SHO सस्पेंड पचपदरा में पीएम नरेंद्र मोदी के प्रस्तावित रिफाइनरी उद्‌घाटन के निरस्त होने के बाद सुरक्षा में बड़ी चूक सामने आई। एक युवक प्रतिबंधित डी एरिया में घुसकर सीधे वीवीआईपी मंच तक पहुंच गया और वहां से वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। मामला सामने आते ही सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गईं। जोधपुर रेंज आईजी सत्येंद्र सिंह ने कड़ा रुख अपनाते हुए पचपदरा एसएचओ अचलाराम को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। आईजी ने माना कि मंच तक पहुंचना गंभीर लापरवाही है। उन्होंने सभा स्थल पर तैनात आरएसी जवानों की भूमिका पर भी सवाल उठाए और उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए आरएसी कमांडेंट को पत्र लिखा है। आईजी के अनुसार, युवक ने मंच पर चढ़कर वीडियो बनाया और वायरल किया, जो सुरक्षा में बड़ी चूक है।