शहर के प्रताप चौक पर श्री महावीर कला मंडल संस्थान की ओर से आयोजित रामलीला में शनिवार रात लंका दहन का रोमांचक मंचन किया गया। हनुमानजी के समुद्र लांघने से लेकर अशोक वाटिका उजाड़ने और रावण की सोने की लंका जलाने तक के प्रसंगों ने दर्शकों को बांधे रखा। वास्तविक लंका का दहन कर प्रसंग को जीवंत बनाने का प्रयास किया गया। लंका दहन के दृश्य के दौरान जय श्रीराम के जयकारों से माहौल गूंज उठा। संस्थान के निदेशक योगेंद्र शर्मा ने बताया कि मंचन में किष्किंधा में राम-सुग्रीव मित्रता के बाद सीता की खोज का प्रसंग दिखाया गया। सुग्रीव ने श्रीराम को सीता के आभूषण दिखाते हुए बताया कि रावण उन्हें पुष्पक विमान से समुद्र पार लंका ले गया है। इसके बाद सौ योजन के विशाल समुद्र को पार कर सीता का पता लगाने की चुनौती सामने आई। जब वानर दल में कोई आगे नहीं आया तो जामवंत ने हनुमानजी को उनकी शक्ति का स्मरण कराया। इस दौरान पार्श्व संगीत में ‘कुछ याद करो, कपि अपना वो बालपन... गीत ने दृश्य को भावपूर्ण बना दिया। इसके बाद हनुमानजी श्रीराम का जयकारा लगाकर समुद्र पार लंका पहुंच गए। पूंछ में आग लगाई तो धू-धू कर जली लंका रावण ने हनुमानजी की पूंछ में आग लगाने का आदेश दिया। इसके बाद हनुमानजी ने जलती पूंछ से लंका में उत्पात मचाते हुए सोने की लंका को आग के हवाले कर दिया। देखते ही देखते लंका दहन का दृश्य साकार हो उठा। इसके बाद हनुमानजी समुद्र में पूंछ की आग बुझाकर रामदल में लौट आए। शनिवार देर रात तक दर्शकों ने रामलीला का आनंद लिया। संस्थान के मुख्य निदेशक हंसराज गेरा ने बताया कि सोमवार को रामलीला में लक्ष्मण शक्ति और कुंभकरण वध के प्रसंगों का मंचन किया जाएगा। माता सीता से मुलाकात के बाद उजाड़ी अशोक वाटिका लंका पहुंचने के बाद हनुमानजी ने काफी खोजबीन की। आखिरकार अशोक वाटिका में माता सीता के दर्शन हुए। हनुमानजी ने श्रीराम की मुद्रिका दिखाकर उन्हें विश्वास दिलाया कि वे प्रभु श्रीराम के दूत हैं। इसके बाद भूख से व्याकुल हनुमानजी ने अशोक वाटिका उजाड़ दी। रावण ने पहले पुत्र अक्षय कुमार और फिर मेघनाथ को भेजा। मेघनाथ ने ब्रह्मपाश का प्रयोग कर हनुमानजी को बंदी बना लिया और रावण के दरबार में पेश किया।