स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने कनिष्ठ अभियंता (JEN) संयुक्त भर्ती परीक्षा पेपर लीक मामले में फरार कोचिंग संचालक को अरेस्ट किया है। आरोपी ने टैबलेट डिवाइस से कई कैंडिडेट्स को लीक पेपर पढ़ाया और एग्जाम सेंटर तक पहुंचाया था। पेपर के एवज में प्रत्येक कैंडिडेट से 25-25 लाख रुपए वसूले थे। एसओजी ने मुखबिर की सूचना पर दबिश देकर 17 अप्रैल को आरोपी भीम सिंह (46) निवासी हरसोरा अलवर हाल बानसूर कोटपूतली बहरोड़ को दबिश देकर पकड़ा। एसओजी फिलहाल गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ कर रही है। आरोपी भीम सिंह ने RPF से वीआरएस लेकर कोचिंग सेंटर खोला था। दोबारा एग्जाम में भी लीक हुआ था पेपर
एसओजी के एडीजी विशाल बंसल ने बताया- कनिष्ठ अभियंता संयुक्त भर्ती परीक्षा दिसंबर 2020 में हुई थी। उसी साल सांगानेर थाने में एग्जाम में चीटिंग को लेकर FIR दर्ज की गई थी। इसके बाद परीक्षा निरस्त कर दी गई थी। सितंबर 2021 में दोबारा कनिष्ठ अभियंता (सिविल) (डिग्रीधारक) संयुक्त भर्ती परीक्षा आयोजित की गई थी। एसओजी की गिरफ्त में आए पेपर लीक गैंग के बदमाश से पूछताछ में सामने आया कि दोबारा हुई परीक्षा का पेपर भी लीक हुआ था। इस पर एसओजी ने जनवरी 2026 में FIR दर्ज की और जांच शुरू की। एसओजी ने पेपर लीक मामले में मास्टरमाइंड जगदीश बिश्नोई, गणपत मालवाड़ा, अनिल उर्फ शेर सिंह मीणा और भूपेंद्र सारण सहित आरोपी गणपत लाल और सुरेश को अरेस्ट किया था। अब पेपर लीक मामले में आरोपी भीम सिंह को अरेस्ट किया गया है। बदमाश सैमसंग टैबलेट एवं एपल आईपैड का करते थे यूज
एडीजी विशाल बंसल ने बताया- एसओजी की जांच में सामने आया कि पेपर लीक गिरोह ने कैंडिडेट्स को लीक पेपर पढ़ाने के लिए सैमसंग टैबलेट एवं एपल आईपैड का यूज किया था। इन इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की खोज के दौरान एसओजी टीम आरोपी भीम सिंह तक पहुंच पाई। एसओजी की रडार पर होने का पता चलते ही आरोपी भीम सिंह फरार हो गया था। कोचिंग और कम्प्यूटर लैब खोली
एडीजी (एसओजी) विशाल बंसल ने बताया- पूछताछ में सामने आया कि आरोपी भीम सिंह और सह आरोपी भूपेंद्र सारण पहले RPF में साथ कार्यरत रहे हैं। इससे दोनों के बीच संपर्क हुआ। RPF से VRS लेने के बाद भीम सिंह ने बानसूर क्षेत्र में कोचिंग संस्थान खोला था। जयपुर में ऑनलाइन परीक्षा के लिए कम्प्यूटर लैब भी संचालित की। 25-30 लाख रुपए में पेपर का सौदा
आरोपी भीम सिंह ने अपने साथी गणपत मालवाड़ा और भूपेंद्र सारण के साथ मिलकर कैंडिडेट्स को जयपुर में एकट्ठा किया। लीक प्रश्नपत्र को टैबलेट और आईपैड के जरिए कैंडिडेट्स को पढ़ाया और परीक्षा में अवैध लाभ पहुंचाया। इसके बाद कैंडिडेट्स को उनके एग्जाम सेंटर्स तक भेजा गया। इसके एवज में प्रत्येक कैंडिडेट से 25 से 30 लाख रुपए लिए गए, जो गैंग के सभी मेंबर्स में डिवाइड होते थे। चीटिंग में यूज टैबलेट आरोपी ने खुद की बेटी को दे दिया था, जिसे बरामद कर लिया गया। कई पेपर लीक में शामिल
प्राथमिक जांच में सामने आया कि आरोपी भीम सिंह पहले भी कई कॉम्पिटिशन एग्जाम के पेपर लीक में शामिल रहा है। इसमें JEN भर्ती परीक्षा-2020, CHO भर्ती परीक्षा-2020, कॉन्स्टेबल भर्ती परीक्षा-2022, हाईकोर्ट एलडीसी भर्ती परीक्षा के पेपर लीक प्रकरण शामिल हैं। एसओजी की ओर से जांच की जा रही है कि पेपर लीक का स्त्रोत क्या था? किन-किन लोगों के जरिए पेपर बांटा गया और किन-किन कैंडिडेट्स को फायदा पहुंचाया गया।