सीकर में जितेंद्रानंद सरस्वती ने कहा- राजस्थान ने सनातन संस्कृति के लिए कई त्याग किए। राजस्थानियों को पानी की कीमत पता थी, इसलिए आज भी पूरी दुनिया में प्याऊ लगाने वाले राजस्थानी ही ज्यादा होते हैं। उन्होंने कहा- सर्वकल्याण की भावना सिर्फ सनातन समाज की सोच है। नदी ही मानव सभ्यता का आधार होती है। पूरी दुनिया में स्वाभिमान की सबसे ज्यादा लड़ाई राजस्थान ने लड़ी। भारतीय शिक्षण मंडल का सोमवार को 57वां स्थापना दिवस मनाया गया। मुख्य अतिथि अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय महामंत्री जितेंद्रानंद सरस्वती ने इस मौके पर यह कहा। मुख्य अतिथि जितेंद्रानंद सरस्वती ने कहा- 228 सालों में भारतीयों की मूल मानसिकता बदल गई। युवाओं में व्यापार की जगह नौकरी के भाव बढ़े। नौकरी करना आत्मा को गिरवी रखने का तरीका है। वहीं मुख्य वक्ता RSS के क्षेत्रीय कार्यकारिणी सदस्य हनुमान सिंह राठौड़ थे। मंच पर जिला कलेक्टर आशीष मोदी व RSS विभाग संघचालक ग्यारसीलाल जाट मौजूद थे। मुकेश शर्मा ने बताया- भारतीय शिक्षण मंडल में एक साल में 12 गतिविधि और 8 कार्य होते हैं। गंगा में सीवर लाइनों से बढ़ रही अशुद्धि जितेंद्रानंद सरस्वती ने मीडिया से कहा- गंगा को अस्वच्छ बताने वाली एजेंसियां कोई भी एजेंडा चलाती हैं। गंगा को साफ करने के अभियान के लिए विकास की जरूरत है। उन्होंने कहा- कोरोना के समय लोग घरों में रहे तो गंगा नदी में 2 फीट नीचे तैरने वाली मछलियां दिखने लगी थीं। अब गंगा में सीवर लाइनों के निकास की वजह से अशुद्धि बढ़ती जा रही है। गांवों का पलायन भी नदियों के बढ़ते प्रदूषण का बड़ा कारण है। गोवंश को राष्ट्रीय दर्जा दिलाने के सवाल पर जितेंद्रानंद सरस्वती ने कहा- वर्ष 2009 में गंगा नदी को राष्ट्रीय नीति में शामिल किया था, लेकिन कुछ हासिल नहीं हुआ। गाय विश्व की माता है, इसे राष्ट्रमाता बनाने पर क्यों तुले हैं? गाय की रक्षा सरकारें नहीं कर सकतीं। इसके लिए आमजन और संत समाज को आगे आने की जरूरत है। लोग गाय का दूध निकालकर सड़कों पर पॉलिथिन खाने के लिए छोड़ देते हैं। सड़कों पर घूमने वाली गायों पर करें कंट्रोल जितेंद्रानंद सरस्वती ने कहा- जो संत या कथावाचक गाय के नाम पर दुकानें चला रहे हैं, वे बताएं कि उन व्यासपीठों से हिंदू समाज के लिए क्या संदेश है? सत्ता और सरकार सबकुछ नहीं करेंगे। उन्होंने कहा- सरकार सिर्फ कत्लखानों पर नियंत्रण कर सकती हैं, लेकिन सड़कों पर घूमने वाली गायों पर हमें कंट्रोल करना होगा। कोई गाय नहीं पालना चाहता और गोशालाओं की सब्सिडी में घोटाले हो रहे हैं। कहा- बलूची मूल में मराठी लड़के जितेंद्रानंद सरस्वती ने कहा- बलूची मूल में मराठी लड़ाके हैं, जो महाराष्ट्र से पलायन करके बलूचिस्तान पहुंचे थे। हितों व स्वतंत्रता के लिए लड़ना उनके खून में हैं। जब भारत आजाद हुआ, तब बलूचिस्तान स्वतंत्र राष्ट्र था। बलूचिस्तान को जबरदस्ती पाकिस्तान के साथ मिलाया गया। बलूचिस्तान को आर्थिक और सामाजिक स्वतंत्रता की जरूरत है। भारत मानवतावादी देश होने के नाते बलूचिस्तान का समर्थक है। पाकिस्तान रोजाना बलूचिस्तान से ढाई किलो सोना निकालकर चीन को दे रहा है, ताकि चीन बलूचिस्तान पर कब्जा बनाए रखने में पाकिस्तान का सहयोग करे और ग्वादर पोर्ट का उपयोग कर सके। कलेक्टर बोले- संस्कृत भाषा को बढ़ावा देने की जरूरत कार्यक्रम में जिला कलेक्टर आशीष मोदी ने कहा- आज संस्कृत भाषा को बढ़ावा देने की जरूरत है। संस्कृत भाषा को कंप्यूटर प्रोग्रामिंग के लिए काम में लिया जाता है। स्कूलों में बच्चे जब थर्ड लेंग्वेज में फ्रेंच और जर्मन चुनते हैं तो ये सोचने की बात है। उपनिवेशवाद ने मानव सभ्यताओं को नष्ट किया कार्यक्रम में वैदिक रीति-नीति से तैयार भारतीय कैलेंडर और पंचांग का विमोचन किया गया। मुख्य वक्ता RSS के क्षेत्रीय कार्यकारिणी सदस्य हनुमान सिंह राठौड़ ने कहा- उपनिवेशवाद ने मानव सभ्यताओं को नष्ट किया। हिंदुइज्म और हिंदुत्व में फर्क समझने की जरूरत है। बच्चों को पढ़ाने की बजाय उनका करियर बनाने की कोशिश हो रही है। मायड़ भाषा में पढ़ाने से बच्चे जल्दी समझेंगे। संचालन डॉ. मोनिका शर्मा व डॉ. आशा राणा ने किया।