विजयादशमी उत्सव के अवसर पर सलूंबर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की ओर से पथ संचलन एवं उत्सव कार्यक्रम हुआ। राजमहल के प्रांगण में एकत्रित हुए स्वयंसेवकों ने प्रार्थना सभा के साथ कार्यक्रम की शुरुआत की। इसके बाद पूर्ण गणवेश में स्वयंसेवक घोष की धुन पर कदमताल करते हुए अनुशासित ढंग से पथ संचलन के लिए निकले। नगर के प्रमुख मार्गों से गुजरे संचलन के दौरान स्वयंसेवकों में अनुशासन, एकरूपता और संगठन के प्रति समर्पण का भाव नजर आया। पथ संचलन राजमहल के प्रांगण से रवाना होकर रावली पोल पहुंचा। यहां से जैन मंदिर, चुंगी नाका, पुराना पोस्ट ऑफिस की गली, नागदा बाजार, नगरची की गली, बस स्टैंड, गांधी चौक, खटीकवाड़ा, पुलिस चौकी, होली चौक, आजाद मोहल्ला, पटेलवाड़ा, विनायक चौक और पुरोहितवाड़ी होते हुए वापस राजमहल के प्रांगण पहुंचा। बौद्धिक में संगठन की शक्ति और राष्ट्र के प्रति कर्तव्यों पर चर्चा कार्यक्रम में मुख्य बौद्धिक वक्ता के रूप में विभाग सह कार्यवाह विष्णु उपस्थित रहे। उन्होंने अपने संबोधन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना के उद्देश्य, विजयादशमी पर्व के महत्व, संगठन की शक्ति, सामाजिक समरसता और राष्ट्र के प्रति नागरिकों के कर्तव्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने स्वयंसेवकों से समाज में सेवा, संस्कार, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति के भाव को मजबूत करने का आह्वान किया। साथ ही सामाजिक एकता और सामूहिक सहभागिता के माध्यम से राष्ट्र एवं समाज के प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन करने का संदेश दिया। विजयादशमी उत्सव के मंच पर नगर संघचालक मुकेश की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम के माध्यम से स्वयंसेवकों ने संगठन के प्रति समर्पण, एकता और राष्ट्रसेवा के संकल्प को दोहराया। प्रार्थना सभा से शुरू हुआ कार्यक्रम पथ संचलन और बौद्धिक सत्र के बाद राष्ट्र एवं समाज के प्रति समर्पण के संदेश के साथ संपन्न हुआ।