टोंक में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की ओर से शरद पूर्णिमा पर पथ संचलन का आयोजन किया गया। इसमें करीब 600 स्वयंसेवकों ने घोष की धुन पर कदम से कदम मिलाते हुए अनुशासन और संगठन शक्ति का परिचय दिया। शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरे पथ संचलन का लोगों ने जगह-जगह पुष्पवर्षा और जयघोष के साथ स्वागत किया। पथ संचलन की शुरुआत गांधी खेल मैदान से हुई। स्वयंसेवकों का काफिला डिपो, बड़ा कुआं और घंटाघर और शहर के प्रमुख मार्गों से होता हुआ हाट बाजार मैदान पहुंचा, जहां कार्यक्रम का समापन हुआ। रास्ते में कई जगह नागरिकों ने पुष्पवर्षा कर स्वयंसेवकों का उत्साहवर्धन किया। घोष की गूंज और स्वयंसेवकों की अनुशासित कदमताल आकर्षण का केंद्र रही। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. एस.के. बृजेश मौजूद रहे। मंच पर टोंक जिला सह संघचालक दिनेश बुंदेल और जिला प्रचारक अशोक भी मौजूद रहे। समाज की एकता के लिए संघ कार्यरत- अशोक समापन के मौके पर जिला प्रचारक अशोक ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना के उद्देश्यों, वैचारिक आधार और 100 वर्षों की यात्रा पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वर्ष 1925 में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने सामाजिक परिस्थितियों देखते हुए महसूस किया कि संख्या में अधिक होने के बावजूद समाज में संगठित चेतना और सामूहिकता का अभाव है। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए संघ की स्थापना की गई, जिसका उद्देश्य समाज को संगठित कर राष्ट्र जीवन को सशक्त बनाना रहा है। अशोक ने सामाजिक एकजुटता के महत्व को बताते हुए स्वयंसेवकों से समाज और राष्ट्रहित के कार्यों में सक्रिय रहने का आह्वान किया। शरद पूर्णिमा पर निकले इस पथ संचलन में अनुशासित कदमताल और घोष की गूंज के बीच संगठन, सामूहिकता और राष्ट्रसेवा का संदेश दिया गया।