कोटा में राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय (आरटीयू) के कुलपति प्रो. निमित चौधरी ने कहा- अब तकनीकी शिक्षा के स्टूडेंट्स को फेल होने के डर से मुक्ति मिलेगी। वे पसंद के अनुसार विषयों का चुनाव कर सकेंगे। कुलपति चौधरी ने नए एजुकेशन सेशन 2026-27 से राष्ट्रीय शिक्षा नीति को पूरी तरह लागू करने की मंगलवार को घोषणा की। कुलपति प्रो. निमित चौधरी ने कहा- स्टूडेंटस की पढ़ाई, गेम्स में परफोर्मेंस के आधार पर क्रेडिट उसके अकाउंट में जमा होते रहेंगे। 3 या 4 साल के कोर्स में पहले साल स्टूडेंट अगर एग्जिट करता है। वह कोर्स पूरा नहीं कर पा रहा है तो पहले साल के 40 क्रेडिट के साथ 4 क्रेडिट उसे और दे होंगे। इसके बाद वह स्टूडेंट एग्जिट ले सकेगा। उसे कोर्स में फेल मानने के बजाय एक साल का सर्टिफिकेट दे दिया जाएगा। आरटीयू में नए कोर्स भी शुरू किए गए हैं। इसमें कोर्स को रोजगारोन्मुखी बनाया गया है। साथ ही पहली बार 8 नई फैकल्टी भी बनाई गई है। अलग-अलग चरण में पढ़ाई कर ले सकेंगे सर्टिफिकेट छात्र अब पढ़ाई को बीच में छोड़ भी सकते हैं और बाद में वहीं से शुरू भी कर सकेंगे। अलग-अलग चरणों पर स्टूडेंट्स को सर्टिफिकेट या डिप्लोमा देकर बाहर निकलने की सुविधा होगी। इससे उनकी अब तक की पढ़ाई बेकार नहीं जाएगी। पहले किसी डिग्री कोर्स को अधूरा छोड़ने पर उसका कोर्स पूरा नहीं माना जाता था और उस स्टूडेंट्स को फेल घोषित कर दिया जाता था। नई प्रणाली में फेल होने का डर खत्म हो जाएगा। छात्र जो कुछ भी सीखेंगे, उसे क्रेडिट के रूप में जोड़ा जाएगा। अगर कोई छात्र किसी विषय में कम अंक लाता है, तो वह क्रेडिट अर्जित करते हुए अपनी पढ़ाई आगे बढ़ा सकेगा। अपनी पसंद के सब्जेक्ट चुनने की आजादी छात्र अपने मुख्य इंजीनियरिंग सब्जेक्ट के साथ म्यूजिक, आट्र्स या अन्य क्षेत्रों (गेम) के विषय भी चुन सकेंगे। इसे कैफेटेरिया अप्रोच कहा गया है। इसमें छात्र अपनी रुचि के अनुसार एक्स्ट्रा कैरिकुलम हासिल कर सकते हैं। पहली बार बनाए 8 नए संकाय, बीसीए कोर्स भी किया शुरू विश्वविद्यालय ने पहली बार 8 नए संकाय बनाए हैं। इनमें कंप्यूटर साइंस, मैनेजमेंट, आट्र्स, साइंस और एनर्जी इंजीनियरिंग जैसे विभाग शामिल हैं। साथ ही पहली बार बीसीए कोर्स की भी शुरुआत की है। छात्रों को ऑनलाइन और ऑफलाइन इंटर्नशिप, लाइव प्रोजेक्ट्स और ऑन-द-जॉब ट्रेनिंग के अवसर मिलेंगे। इसके लिए प्रोफेशनल एजेंसियों और उद्योगों के साथ तालमेल किया जा रहा है। आधुनिक केंद्र और स्थानीय भाषा में पढ़ाई भारतीय ज्ञान परंपरा को बनाए रखने के लिए भारत प्रज्ञा केंद्र बनेगा। छात्रों के आध्यात्मिक और मानसिक विकास के लिए प्राणवेद केंद्र की स्थापना होगी। विषयों को बेहतर समझने के लिए स्थानीय भाषाओं में भी पढ़ाई को बढ़ावा दिया जाएगा। डिजिटल क्रेडिट बैंक रहेगा छात्रों के सभी क्रेडिट एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट्स में डिजिटल रूप से सुरक्षित रहेंगे। इन्हें आवश्यकतानुसार एक संस्थान से दूसरे संस्थान में ट्रांसफर किया जा सकेगा। कुलपति प्रो. निमित चौधरी ने कहा- इन सुधारों का उद्देश्य राजस्थान के युवाओं को केवल डिग्रीधारी बनाना नहीं, बल्कि उन्हें वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी और आत्मनिर्भर बनाना है। उन्होंने बताया- 4 साल के कोर्स की डिग्री में 160 क्रेडिट छात्रों को मिलेंगे। इसमें से स्टूडेंटस को कोर्स के 4 साल बाद पूरा करने के लिए 160 में से 96 क्रेडिट पूरे करने पड़ेंगे। जो उसके कोर्स के मूल सब्जेक्ट के रहेंगे। इसके अलावा 32 क्रेडिट कॉमन पूल से लिए जाएंगे और 32 क्रेडिट ऐच्छिक होंगे।