सलूम्बर शहर के भोपा फला स्थित प्राचीन भदेरिया भैरूजी मंदिर में नवमी की रात नवरात्रि महोत्सव के तहत तम्बोल का आयोजन हुआ। देर रात तक चले इस आयोजन में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। आज दशमी पर भोपा सरवण स्नान के लिए सरणी नदी की ओर निकलेंगे। सदियों पुराना है मंदिर का इतिहास भोपा फला स्थित भदेरिया भैरूजी और सोनार माता जी का प्राचीन मंदिर क्षेत्र की आस्था का प्रमुख केंद्र है। मंदिर से मेवाड़, वागड़ और छप्पन-मेवल क्षेत्र के श्रद्धालुओं की गहरी आस्था जुड़ी है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, इस मंदिर का संबंध सलूम्बर के राजपरिवार से भी रहा है। पीढ़ियों से श्रद्धालु यहां पूजा-अर्चना करते आ रहे हैं। नवमी की रात जागरण, जयकारों के बीच तम्बोल नवरात्रि की नवमी पर मंदिर में विशेष धार्मिक आयोजन और रात्रि जागरण की परंपरा निभाई जाती है। देर रात तक श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला जारी रहा। जयकारों और ढोल-नगाड़ों के बीच तम्बोल हुआ। इसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे और उत्साह के साथ कार्यक्रम में भाग लिया। दशमी पर सरवण स्नान के लिए निकलेंगे भोपा मंदिर की परंपरा के अनुसार दशमी पर सरवण स्नान का विशेष महत्व है। इस मौके पर आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में भोपा पारंपरिक वेशभूषा में एकत्रित होते हैं। इसके बाद ढोल-नगाड़ों की गूंज के बीच श्रद्धालु सरणी नदी की ओर प्रस्थान करते हैं। हर साल इस आयोजन में हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं। स्थानीय जानकारी के अनुसार दशमी पर हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने का अनुमान रहता है।