चित्तौड़गढ़ में अमावस्या पर मेवाड़ के प्रसिद्ध कृष्णधाम श्रीसांवलियाजी मंदिर में श्रद्धा का अद्भुत नजारा देखते को मिला। तड़के मंगला आरती से ही दर्शन के लिए भक्तों की लंबी-लंबी कतारें लग गई। जैसे-जैसे दिन चढ़ता गया, वैसे-वैसे श्रद्धालुओं की संख्या भी बढ़ती चली गई। इस मौके पर सांवरा सेठ को सोने की विशेष पोशाक धारण कराई गई। जिसके दर्शन करने के लिए राजस्थान के साथ-साथ मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। पूरे मंदिर परिसर में भक्ति, उत्साह और आस्था का माहौल बना रहा। मंगला आरती से शुरू हुआ दर्शन का सिलसिला अमावस्या के कारण सोमवार रात से ही श्रद्धालुओं का मंदिर पहुंचना शुरू हो गया था। कई परिवार रात में ही मंदिर परिसर और आसपास रुक गए ताकि सुबह सबसे पहले सांवरा सेठ के दर्शन कर सकें। मंगलवार तड़के मंगला आरती के साथ ही मंदिर के पट खुलते ही श्रद्धालुओं का दर्शन का सिलसिला शुरू हो गया। सुबह से ही मंदिर के बाहर लंबी कतारें नजर आने लगीं। मंदिर परिसर में हर तरफ श्रद्धालु भजन-कीर्तन करते हुए अपनी बारी का इंतजार करते दिखाई दिए। इस दौरान भगवान सांवरा सेठ के जयकारे गूंजने लगे। दर्शन के लिए महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं सहित हर उम्र के लोग पहुंचे। पूरे दिन मंदिर परिसर में भक्तों की आवाजाही लगातार बनी हुई है। भगवान को सोने की विशेष पोशाक पहनाई अमावस्या पर सांवरा सेठ का आकर्षक श्रृंगार किया गया। भगवान को सोने की विशेष पोशाक पहनाई गई। जिसने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। जैसे ही भक्त गर्भगृह के सामने पहुंचे, सभी की नजरें सांवरा सेठ के दिव्य स्वरूप पर टिक गईं। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने परिवार की खुशहाली, सुख-समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करते हुए दर्शन किए। मंदिर में "जय सांवरा सेठ" के जयकारों से माहौल भक्तिमय बना हुआ हैं। अमावस्या पर दर्शन के लिए उमड़े श्रद्धालु श्रीसांवलियाजी मंदिर में हर अमावस्या पर विशेष भीड़ रहती है, लेकिन इस बार भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। राजस्थान के अलग-अलग जिलों के अलावा मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र से भी हजारों भक्त दर्शन के लिए आए। सुबह से शुरू हुई भीड़ दोपहर और शाम तक लगातार बढ़ती जाएगी। मंदिर प्रशासन ने दर्शन व्यवस्था को सुचारु रखने के लिए जरूरी इंतजाम किए, जिससे श्रद्धालुओं को आसानी से दर्शन मिल सकें। पूरे दिन मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्र में धार्मिक माहौल बना रहा। अमावस्या पर उमड़ी यह भीड़ एक बार फिर यह साबित करती है कि सांवरा सेठ के प्रति लोगों की आस्था लगातार बढ़ रही है और हर महीने आने वाली अमावस्या पर यहां देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।