अलवर के सरिस्का के जंगल में बाघिन ST-26 ने 2 शावकों को जन्म दिया है। कैमरा ट्रैप में वह दो शावकों के साथ देखी गई। इन नन्हें मेहमानों के आने से सरिस्का में टाइगर का कुनबा बढ़कर 58 हो चुका है। सरिस्का के अकबरपुर और तालवृक्ष रेंज में नए शावक दिखे हैं। वन विभाग द्वारा लगाए गए कैमरा ट्रैप में बाघिन अपने दोनों शावकों के साथ घूमती हुई कैद हुई है। तस्वीरों में दोनों शावक पूरी तरह से स्वस्थ और बेहद सक्रिय दिखाई दे रहे हैं। करीब 6 से 7 वर्ष की यह बाघिन, सरिस्का की प्रसिद्ध बाघिन एसटी-14 की संतान है। बाघिन एसटी-26 का यह पहला लिटर (सफल प्रजनन) है। बाघिन मुख्य रूप से सरिस्का के तालवृक्ष और अकबरपुर रेंज क्षेत्र में सक्रिय रहती है। स्थानीय स्तर पर जन्मी बाघिन द्वारा सफल प्रजनन से सरिस्का में बाघों की आबादी और सरिस्का के कुनबे को नई मजबूती मिली है। वन विभाग का अलर्ट: सघन मॉनिटरिंग और सुरक्षा के निर्देश शावकों की साइटिंग के बाद उप वन संरक्षक (बाघ परियोजना सरिस्का) ने संबंधित रेंज के फील्ड स्टाफ को तुरंत निर्देश जारी किए हैं। कैमरा ट्रैप और नियमित पैदल गश्त के जरिए बाघिन और दोनों शावकों पर 24 घंटे पैनी नजर रखी जाएगी। शावकों के क्षेत्र में किसी भी तरह का मानवीय हस्तक्षेप या व्यवधान न्यूनतम रखा जाएगा। वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 और एनटीसीए (NTCA) के दिशा-निर्देशों के तहत क्षेत्र में गश्त और सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत कर दिया गया है। वन विभाग की ग्रामीणों और पर्यटकों से अपील वन विभाग ने पर्यटकों, स्थानीय ग्रामीणों और आमजन से सहयोग की अपील की है। वन्यजीवों से उचित दूरी बनाए रखें और पर्यटन नियमों का कड़ाई से पालन करें। यदि गांव या आसपास के क्षेत्र में बाघ या अन्य वन्यजीव का मूवमेंट दिखाई दे, तो तुरंत नजदीकी वन कार्यालय को सूचित करें।