गर्मी और धूप के बीच सरिस्का में टाइगर को डेरा भी वाटर पॉइंट पर रहने लगा है। टाइगर पानी में नहाते और उसके पास ही आराम करते दिख रहे हैं। इसका वीडियो भी सामने आया है। बफर जोन के जंगल में पिछले कुछ दिनों में पांच टाइग्रेस और 3 शावक पानी में नहाते दिखे है। बारा लिवारी के आस-पास आज सुबह टाइग्रेस एसटी- 19 और उसके 4 शावक देखें गए हैं। बता दें कि बारा लिवारी अलवर शहर से लगता जंगल है। ST-19 और उसके चार शावकों की साइटिंग सरिस्का के सीसीएफ संग्राम सिंह ने बताया कि बफर रेंज में इन दिनों ST-19 और उसके चार शावकों की अच्छी साइटिंग हो रही है। अलवर बफर क्षेत्र में पानी का बेहतर इंतजाम है। सरिस्का बफर क्षेत्र में आने वाले टूरिस्ट को इन बाघों की अच्छी साइटिंग हो रही है। बफर जोन में कुल 11 टाइगर और शावक बफर जोन में रेंजर शंकर सिंह ने बताया कि अलवर शहर के आस-पास के जंगल में कुल 11 टाइगर, टाइग्रेस और शावक हैं। बफर जोन में ST 18, ST 19 व उसके चार शावक, ST 2302 व इसके दो शावक, ST 2403 व ST 2403 हैं। ST 18 मेल हैं। बाकी चार फीमेल हैं। इसके अलावा 6 शावक हैं। इस तरह बफर जोन में कुल 11 टाइगर, शावक है। टाइग्रेस ST 19 बारा लिवारी के आस-पास, टाइग्रेस 2302 बाला किला व अंधेरी के आस-पास, टाइगर ST 18 लिवारी सहित दूर तक जंगल में घूमता है। वहीं टाइग्रेस ST 2403 व 2404 की चूहड़सिद्ध लवकुश वाटिका की तरफ है। बफर जोन से पहले एक टाइगर को रामगढ़ विषधारी जंगल विस्थापित किया गया था, जिसकी वहां मौत हो गई। वहीं एक टाइग्रेस ST 2405 अकबरपुर की तरफ निकल गई। सरिस्का में बाघों की संख्या 50 के पार सीसीएफ ने बताया कि सरिस्का में साल 2008 में बाघों का पुनर्स्थापन शुरू हुआ था। अब संख्या शावकों सहित 50 के पार है। राज्य सरकार के प्रयासों से ये टाइगर रिजर्व एनसीआर क्षेत्र में तेजी से बढ़े हैं। सरिस्का 2004 में बाघ विहीन हो गया थ।