राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) के RAS परीक्षा-2024 के रिजल्ट में अलवर के बेटे-बेटियों ने विकट हालातों में बड़ा परिणाम दिया है। नरेगा में काम करने वाली मां की बेटी सुमन बाई ने 2334वीं रेंक हासिल की है। विधवा कोटे से 4th रेंक है। जिनके पिता की मौत हो चुकी है। सिर्फ 6 बहनें हैं। सुमन रामगढ़ के गुगडोद गांव निवासी है। पिता की मौत के बाद परिवार के इतने तंगहाल थे कि कई बार तो उसके पास जयपुर से अलवर आने का किराया नहीं होता था। वहीं थानागाजी के डहरा गांव के कमलेश ने 1757वीं रेंक हासिल की। जिसके पिता विराट नगर में पुरानी घड़ी सुधारने की दुकान चलाते हैं। जयपुर में रहकर पुलिस एसआई की बेटी ने पहले प्रयास में 568वीं रेंक प्राप्त की। जिसने एमकॉम की पढ़ाई करने के बाद एक साल में नए सिरे से सब सब्जेक्ट तैयार कर अच्छा परिणाम देकर सबको चौका दिया। सुमन की मां ने 40 हजार रुपए में 1 बीघा खेत गिरवी रखा अलवर के रामगढ के गुगडोद गांव निवासी सुमन बाई ने ओवरऑल 2324वीं रेंक और विधवा कोटे से चौथी रेंक प्राप्त की। सुमन ने बताया कि वे छह बहनें हैं। पिता श्रीमाया चंद की 2018 में मौत हो गई थी। उसके बाद से मां हरनंदी देवी नरेगा में मजदूरी करती है। घर में छह बहनें हैं। बड़ी बहन शादीशुदा है। छोटी बहनें चार हैं। एक बहन राजकुमारी बीएसएफ में नौकरी लगी है। जिसकी ड्यूटी असम में है। तीन बहनें पढ़ाई कर रही हैं। घर पर रहक सेल्फ स्टडी की है। कुछ समय जयपुर में मॉक इंटरव्यू के लिए कोचिंग गई थी। लेकि हमारे घर के आर्थिक हालत अधिक खराब रहे। ऐसी नौबत भी आई कि 2022 में 40 हजार रुपए में एक बीघा खेत गिरवी रखकर 9 हजार रुपए की किताबें और अन्य सामान खरीदा था। कई बार किराया भी नहीं होता था। छोटी बहनों का पालनहार की सहायता राशि से घर खर्च चलाया। बीच-बीच में ताऊ के बेटे व मामा के बेटे ने पढ़ने के लिए गाइड किया है। आरएएस में जाने का मेरा ही मन था। मुझे लग रहा है कि डीएसपी या तहसीलदार बन जाऊंगी। घड़ी सुधारने वाले का बेटा भी पास, 1757वीं रेंक अलवर जिले के थानागाजी के डहरा गांव निवासी अभ्यर्थी कमलेश ने पहले प्रयास में आरएएस के एग्जाम में 1757 वीं रेंक प्राप्त की है। कमलेश के पिता रामवतार की विराट नगर में घड़ी सुधारने की दुकान है। कमलेश ने बताया कि वह यूपीएससी की तैयारी कर रहा था। इसके साथ आरएएस का एग्जाम भी दिया। कुछ तो सिलेबस एक जैस होता है। कुछ आखिरी दिनों में आरएएस के एग्जाम पर फोकस किया। पहले प्रयास में 1757वीं रेंक प्राप्त की है। कमलेश ने बताया कि उसके पिता विराट नगर में घड़ी सुधारने की दुकान चलाते हैं। उसके दो चचेरे भाई ऋषिराज व पुष्पराज आरएएस क्लियर कर चुके हैं। ऋषिराज अभी सांभर में एसडीएम हैं। वहीं पुष्पराज की ट्रेनिंग जारी है। एग्जाम पास करने के बाद घर में खुशी का माहौल है। M.com के बाद सारे सब्जेक्ट नए, फिर भी चयन तिजारा के टपूकड़ा के निकट राबड़का गांव निवासी सपना यादव ने पहले ही प्रयास में 568वीं रैंक हासिल कर ली। सपना के पिता पुलिस सब इंस्पेक्टर हैं। जिनकी जयपुर आयुक्तालय में ड्यूटी है। खास बात यह है कि सपना के पिता उसे सीए या बैंकिग क्षेत्र में भेजना चाहते थे। लेकिन बेटी को यह रास नहीं आया। इस कारण एमकॉम करने के बाद वापस आरएएस के पूरे सब्जेक्ट तैयार किए। लेकिन एक ही साल में अच्छी मेहनत कर जोरदार परिणाम दिया है। सपना के पिता पुलिस सब इंस्पेक्टर गजराज यादव ने बताया कि बेटी ने जयपुर में पढ़कर ही स्कूल व कॉलेज की पढ़ाई पूरी की है। 12वीं के बाद ही बेटी के बारे में सोच लिया था कि उसे सीए बनाएंगे या बैंकिंग के क्षेत्र में भेजेंगे। जिसके कारण पहले B.Com कराया। उसके बाद M.Com की पढ़ाई की। लेकिन बेटी को यह करने के बाद लगा कि उसे बैकिंग के क्षेत्र में नहीं जाना। तब उसने खुद ने अपना लक्ष्य तय किया कि सिविल नौकरी करनी है। फिर एमकॉम की पढ़ाई करते ही सब्जेक्ट बदल लिए। आरएएस की तैयारी शुरू कर दी। पूरे एक साल कड़ी मेहनत की। जयपुर में की कोचिंग ली। घर पर पूरा समय पढ़ाई पर फोकस किया। अब रिजल्ट आया तो बेटी ने सबको चौका दिया। पहले ही प्रयास में 568वीं रेंक प्राप्त की है। राबडका गांव के पूर्व सरपंच नरेंद्र यादव ने बताया कि सपना उनकी चचेरी बहन है। आरएएस एग्जाम में अच्छी रेंक लाने पर पूरे गांव में खुशी है।