राजस्थान के जोधपुर, अजमेर, उदयपुर, बीकानेर सहित 42 शहर और कस्बों के संबंधित विधायकों ने अपने इलाके के मास्टर प्लान बदलवा लिए। मंत्री की हरी झंडी भी मिल गई लेकिन, हैरानी की बात है कि यूडीएच मंत्री झाबरसिंह खर्रा के गृह जिले के शहर सीकर का मास्टर प्लान अटक गया। मास्टर प्लान पर कांग्रेस-बीजेपी में खूब तनातनी हुई, लेकिन कांग्रेस सरकार के समय बदले मास्टर प्लान का नया खाका अटक गया। खर्रा विधानसभा से लेकर कई कार्यक्रमों में सीकर मास्टर प्लान को लेकर घोषणा कर चुके हैं। इसके बाद भी मास्टर प्लान को हरी झंडी नहीं दी जा रही। इसी तरह पूर्व यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल के कोटा शहर का मास्टर प्लान 2 बार इस सरकार में बदल दिया और नया अप्रूव कर लिया। सीएम के भरतपुर में 3 दर्जन से ज्यादा गांव मिलाकर नया मास्टर प्लान अप्रूव हो गया। लेकिन महकमे के मंत्री ही रह गया। अब सीकर का मास्टर प्लान तीसरी बार बदलने की तैयारी है। यहां के मास्टर प्लान मंजूर खाटूश्यामजी, नीम का थाना, सूरतगढ़, सीकर, पिलानी, बीकानेर, इटावा, भीनमाल, प्रतापगढ़, कपासन, महवा, देवली, रूपवास, धौलपुर, कोटा, नसीराबाद, डेगाना, खंडेला, सरदारशहर, पाली, लालसोट डूंगरपुर, गंगापुरसिटी, सुजानगढ़, श्रीगंगानगर, तिजारा, सवाईमाधोपुर, हनुमानगढ़, जोधपुर, अजमेर, मांडलगढ़, हिंडौन, भीलवाड़ा, करौली, नौखा, सिरोही, उदयपुर, सुमेरपुर, पुष्कर के विधायकों ने अपने इलाकों के मास्टर प्लान अप्रूव करा लिए। 49 जगह माइक्रो प्लान का संकट इस सरकार में ढाई साल में नए बनाए 49 शहरों के लिए तैयार किए जाने वाले मास्टर प्लान में सेक्टर और जोन स्तर की माइक्रो प्लानिंग शामिल नहीं होगी। इन शहरों के वार्डों का विकास, स्थानीय जरूरतों और बुनियादी सुविधाएं और उनकी योजना अधूरी पड़ी है। सार्वजनिक सुविधाओं, स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की योजना भी अटक गई।