बीटी कपास की बुवाई के लिए आने वाला उचित समय है। बुवाई का काम किसानों को 20 मई तक पूरा कर लेना चाहिए ताकि फसल को अनुकूल वातावरण मिल सके और उत्पादन बेहतर हो। बढ़िया पैदावार के लिए कपास बीज को उपचारित करना जरूरी है। इसके लिए एक ग्राम स्ट्रेप्टोसाइक्लिन, एक ग्राम व्यापारिक गंधक और 10 लीटर पानी के घोल में कपास का बीज डालें। रोयेदार बीज की मात्रा 5-6 किलोग्राम होनी चाहिए और इसे करीब 6-8 घंटे तक घोल में रखें। बिना रोयेदार बीज की 6-8 किलोग्राम मात्रा को दो घंटे तक घोल में डालें। दीमक की समस्या वाले क्षेत्रों 10 एमएल क्लोरोपाइरीफॉस 20 ईसी और 10 एमएल पानी प्रति किलो बीज की दर से मिलाकर थोड़ा-थोड़ा बीज पर छिड़काव करें। इसके बाद बीज को अच्छी तरह से मिलाएं और 30-40 मिनट तक बीज को छाया में सुखाकर बुवाई करें। कपास की बुवाई का तरीका कपास की बुवाई बीज-उर्वरक संयुक्त ड्रिल या प्लांटर से करें। या एक कतार वाली ड्रिल से बीज को 4-5 सेंटीमीटर गहरा बोएं। कतार से कतार की दूरी 67.5 सेमी और पौधे से पौधे की दूरी 30 सेंटीमीटर रखें। संकर और बीटी कपास की बुवाई के लिए कतार से कतार की दूरी 67.5 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी 60 सेमी. रखें या कतार से कतार की दूरी 100 सेमी और पौधे से पौधे की दूरी 45 सेंटीमीटर करें। पछेती बुवाई में पौधों की दूरी कम और बीज ज्यादा करना चाहिए। बुवाई के समय कतारों का भी विशेष ध्यान रखें। पूर्व से पश्चिम की दिशा में कतारों में बोई गई कपास उत्तर से पीएम कुसुम योजना - सोलर पंप संयंत्र पर 60% अनुदान (पीएम-कुसुम) के कम्पोनेंट-बी के तहत किसानों को 3, 5 और 7.5 हॉर्सपावर क्षमता वाले सोलर पंप संयंत्र लगाने के लिए 60 प्रतिशत तक का अनुदान दिया जा रहा है। जमीन है, लेकिन कृषि विद्युत कनेक्शन नहीं है, और खेतों में सिंचाई के लिए जल संसाधन उपलब्ध (नहरी, फार्म पॉन्ड, कुएं आदि) हैं, वे किसान इस योजना के लिए आवेदन कर सकते हैं। जिन किसानों के पास ट्रैक्टर, जेनरेटर या डीजल पंप सेट है, वे भी पात्र होंगे। किसान ई-मित्र केंद्र या स्वयं पीएम कुसुम आईटी पोर्टल (https://pmkusum.rajasthan.gov.in) से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन के साथ आवश्यक दस्तावेज (जन आधार संख्या, भूमि दस्तावेज, सिंचाई जल स्रोत की उपलब्धता, बिजली कनेक्शन नहीं होने का शपथ पत्र आदि) अपलोड करने होंगे। अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के किसानों को व्यक्तिगत सोलर पंप पर 45 प्रतिशत अतिरिक्त अनुदान भी दिया जाएगा।