अरावली पर्वत शृंखला को बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बीच खान एवं भूविज्ञान निदेशालय ने एक बड़ा और कड़ा आदेश जारी किया है। इसके तहत सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों के मद्देनजर अरावली क्षेत्र के लंबित पड़े माइनिंग प्रस्तावों को अब केवल सशर्त पर्यावरण स्वीकृति (कंडीशनल ईसी) मिलेगी। हालांकि, इस मंजूरी के बाद भी पट्टाधारक सीधे तौर पर जमीन की सफाई या खनन कार्य शुरू नहीं कर पाएंगे। सुप्रीम कोर्ट के तीन बड़े फैसलों का हवाला: खान विभाग के अतिरिक्त निदेशक (पर्यावरण एवं विकास) महेश माथुर द्वारा जारी सर्कुलर में सुप्रीम कोर्ट के तीन बड़े आदेशों (9 मई 2024, 29 दिसंबर 2025 और 26 फरवरी 2026) का हवाला दिया गया है। फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया (एफएसआई) की 25 अगस्त, 2010 की रिपोर्ट में तय अरावली पॉलीगॉन के दायरे में आने वाले सभी प्रस्तावों पर यह नियम सख्ती से लागू होगा। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड व लीज डीड पर भी ब्रेक मंजूरी के बाद भी ये 2 शर्तें लागू होंगी