देश को सबसे ज्यादा फौजी देने वाले राजस्थान के वीर परिवारों पर इन दिनों एक अजीब संकट मंडरा रहा है। यह संकट प्रदेश की लचर प्रशासनिक व्यवस्था के कारण उपजा है। प्रदेश में डिजिटल आय प्रमाण पत्र नहीं बनने के कारण हजारों सैनिक परिवारों के हक और सुविधाएं तो छिन ही रही हैं, साथ ही, सरहद पर मुस्तैद जवानों पर सेना द्वारा फर्जी दस्तावेज देने के तहत कार्रवाई का खतरा पैदा हो गया है। भास्कर की पड़ताल में सामने आया कि केंद्र सरकार के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद पिछले चार सालों से प्रदेश के राजस्व विभाग के अधिकारियों, तहसीलदार, एसडीएम, कलेक्टर के डिजिटल हस्ताक्षरयुक्त आय प्रमाण पत्र जारी नहीं किए जा रहे। डिजिटल प्रमाण पत्र और वेरिफिकेशन नहीं होने से सेना व केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालय स्व-घोषणा आय प्रमाण पत्र को स्वीकार नहीं करते। ऐसे में केंद्र सरकार व सेना की विभिन्न सुविधाओं से सैनिक व उनके परिवार वंचित हो रहे हैं। केंद्र ने सीएस को पत्र लिखा: केंद्र सरकार के जनजातीय मामलों के मंत्रालय के संयुक्त निदेशक ने 17 जून 2022 को ही राजस्थान के मुख्य सचिव को बकायदा पत्र लिखकर इस व्यवस्था को बंद करने और डिजिटल प्रणाली लागू करने का आदेश दिया था। पत्र के साथ बाकायदा एक डिजिटल सर्टिफिकेट का प्रारूप भी भेजा गया था, लेकिन प्रशासनिक सुस्ती के चलते 4 साल बाद भी इस पर कोई अमल नहीं हुआ। केस 1: आर्मी अस्पताल में पिता को इलाज नहीं मिला झुंझुनूं के एक सैन्य अधिकारी के पिता रोहिताश सिंह खेती करते हैं। उन्हें आर्मी अस्पताल में नियमित इलाज की जरूरत होती है। लेकिन पिछले दो साल से वे दर-दर भटक रहे हैं। वे कहते हैं कि सेना के अस्पताल में बिना डिजिटल वेरिफिकेशन के इलाज नहीं होता है। केस 2: नागौर : विभाग ने सत्यापन से मना किया नागौर के एक जवान ने स्व-घोषणा आय प्रमाण पत्र जमा कराया। सेना ने राजस्थान के राजस्व विभाग से सत्यापन कराया, तो विभाग ने लिख दिया कि वे ऐसा कोई सर्टिफिकेट जारी नहीं करते। नतीजा- सैनिक पर फर्जी दस्तावेज देने के आरोप में अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू हो गई है। छात्रवृत्ति और इलाज दोनों अटके