नरेंद्र चोटिया | अलवर आपदा प्रबंधन को मजबूत करने के लिए अलवर, खैरथल-तिजारा और कोटपूतली बहरोड़ सहित जयपुर और अजमेर जोन के 13 जिलों में अत्याधुनिक इमरजेंसी सेंटर की स्थापना होगी। इनके बनने से आपदा, दुर्घटना या किसी भी संकट की स्थिति में तेजी से रिस्पॉन्स संभव होगा। इससे प्रशासनिक निगरानी मजबूत होगी और जिले में राहत एवं बचाव कार्यों की दक्षता बढ़ेगी। किसी भी दुर्घटना, प्राकृतिक आपदा या बड़े हादसे के दौरान रिस्पॉन्स टाइम कम होगा, निर्णय तेजी से होंगे और राहत-बचाव कार्य अधिक प्रभावी तरीके से संचालित किए जा सकेंगे। राजकॉम्प इंफो सर्विसेज लिमिटेड (आरआईएसएल) ने राज्य के 13 जिलों में जिला इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर स्थापित करने के लिए टेंडर जारी किया है। परियोजना की कुल अनुमानित लागत करीब 7.90 करोड़ रुपए रखी गई है और कार्य अवधि 3 महीने निर्धारित की गई है। ऐसा होगा हाईटेक कमांड सेंटर का सेटअप। वर्तमान व्यवस्था में किसी भी बड़े हादसे या आपदा के समय पुलिस, स्वास्थ्य, फायर और प्रशासनिक विभागों के बीच समन्वय में देरी एक बड़ी चुनौती रही है। कई बार सूचनाएं अलग चैनलों से आती हैं, जिससे निर्णय लेने में समय लगता है। इसका समाधान होगा। यहां सभी विभागों को एक डिजिटल नेटवर्क से जोड़ा जाएगा, जिससे सूचना का प्रवाह तुरंत और सटीक होगा। घटना की जानकारी मिलते ही कंट्रोल रूम से सीधे निर्देश जारी किए जा इन इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर में आधुनिक कम्युनिकेशन रूम, ऑपरेशन रूम, कॉन्फ्रेंस हॉल, सर्वर रूम, डॉर्मिटरी और कंट्रोल सिस्टम स्थापित किए जाएंगे। साथ ही यहां लेन नेटवर्क, इलेक्ट्रिकल सिस्टम, फर्नीचर और निगरानी से जुड़ी सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी, जिससे किसी भी आपदा के दौरान त्वरित निर्णय और समन्वय संभव हो सके। पूरा कार्य टर्नकी बेसिस पर किया जाएगा, जिसमें सिविल, इलेक्ट्रिकल, इंटीरियर और तकनीकी सभी काम शामिल होंगे। ठेकेदार को सामग्री, श्रम और अन्य सभी खर्च खुद वहन करने होंगे। साथ ही कार्य की गुणवत्ता और सुरक्षा के लिए विशेष स्टाफ तैनात करना अनिवार्य होगा। एनसीआर बेल्ट के लिए अहम साबित होगा यह सिस्टम अलवर, खैरथल-तिजारा और कोटपूतली-बहरोड़ जिले भौगोलिक रूप से दिल्ली-एनसीआर से जुड़े हुए हैं। यहां लगातार बढ़ता ट्रैफिक, औद्योगिक गतिविधियां और शहरीकरण प्रशासन के लिए नई चुनौतियां पैदा कर रहे हैं। सड़क हादसों, औद्योगिक घटनाओं और भीड़भाड़ वाली परिस्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया बेहद जरूरी होती है। ऐसे में डीईओसी इन जिलों के लिए एक फास्ट रिस्पॉन्स मैकेनिज्म के रूप में काम करेगा। इससे न केवल घटनाओं पर तुरंत नजर रखी जा सकेगी, बल्कि राहत और बचाव कार्यों को भी तेजी से लागू किया जा सकेगा। यह होगा जिला इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर में जिला इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर एक हाईटेक कंट्रोल रूम होगा, यहां से आपदा या किसी भी आपात स्थिति में पूरे जिले की निगरानी और संचालन किया जाएगा। ऑपरेशन रूम: सभी विभागों के समन्वय से त्वरित निर्णय .कम्युनिकेशन रूम: पुलिस, प्रशासन व चिकित्सा एजेंसियों के बीच रियल-टाइम संपर्क .कॉन्फ्रेंस हॉल: आपात बैठक व रणनीति निर्धारण .सर्वर व आईटी सिस्टम: लाइव ट्रैकिंग, डेटा मॉनिटरिंग और सूचना प्रबंधन .डॉर्मिटरी: तैनात कर्मियों के ठहरने की व्यवस्था .टेक्निकल सेटअप: फॉल्स सीलिंग, इलेक्ट्रिकल सिस्टम, डिस्प्ले व अन्य आधुनिक सुविधाएं