बांसवाड़ा के टिंबा-गांबड़ी में वागड़ मेवाड़ कल्याण विकास संस्थान की ओर से महात्मा गांधी कॉलेज के नाम से एक ही भवन और परिसर में पांच कॉलेज संचालित हैं। पड़ताल में आया कि कॉलेजों की संख्या बढ़ती गई। भवन और मूल ढांचा नहीं बदला। कॉलेज भवन भी सरकारी जमीन पर अतिक्रमण करके बनाया है। तहसीलदार नोटिस दे रहे हैं। एक ही जगह, एक ही लोकेशन, एक ही नक्शा, एक ही जगह बिल्डिंग। फिर भी तहसीलदार ने पांच अलग-अलग कॉलेजों के लिए जमीन के प्रमाण पत्र जारी कर दिए। यही नहीं, सरकार ने भी इन कॉलेजों के निरीक्षण के आधार पर एक ही लोकेशन, एक ही नक्शे पर पांच कॉलेजों की मान्यता दे रखी है। 2004 में इस परिसर में फार्मेसी कॉलेज की शुरुआत हुई थी। 2006 में बीएड शुरू हुआ। 2019 तक तीन अन्य कॉलेज भी परिसर में खुल गए। जिस दिन, जिस विभाग या विश्वविद्यालय की टीम निरीक्षण के लिए आती है, कॉलेज के मुख्य गेट पर उसी संस्थान के नाम का बोर्ड टांग दिया जाता है। मान्यता संबंधी दस्तावेजों में हर जगह एक ही नक्शा, एक ही लोकेशन, वही कमरे दिखा रखे हैं। मौके पर कक्षाओं के लिए करीब 25 कमरे ही हैं, जबकि पांचों संस्थानों में मिलाकर 1200 से अधिक विद्यार्थियों का नामांकन है। दस्तावेज में 50 में से 30 से ज्यादा स्टाफ यूपी से संबंधित बताया गया है। हमने अतिक्रमण नहीं किया। नोटिस के जवाब दे दिए गए। हमारे चार पांच कॉलेज चल रहे हैं, लेकिन सभी की मंजूरी ले रखी है, बिना मंजूरी कोई कॉलेज नहीं चल रहा है।
वर्धमान जैन, अध्यक्ष, वागड़ मेवाड़ कल्याण विकास संस्थान एक ही छत के नीचे संचालित किए जा रहे हैं 5 कॉलेज 1. महात्मा गांधी स्कूल ऑफ फार्मेसी: फार्मेसी 120 सीटें
2. महात्मा गांधी बीएड कॉलेज: 2 वर्षीय बीएड 200 सीटें
3. महात्मा गांधी ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन:4 वर्षीय इंटीग्रेटेड बीएड 400 सीटें
4. महात्मा गांधी स्कूल ऑफ टीचर्स ट्रेनिंग: 2 वर्षीय STC 200 सीटें
5. महात्मा गांधी कॉलेज: बीए./बीएससी300 छात्र एक्सपर्ट : अलग भूमि-भवन होना जरूरी है प्रत्येक कॉलेज के लिए अलग भूमि-भवन, न्यूनतम 12 कक्ष, लैब, लाइब्रेरी, अलग प्रबंध समिति, तहसीलदार/एसडीएम द्वारा जियो-टैगिंग के साथ जारी भूमि-भवन प्रमाण पत्र’ अनिवार्य है। यह पूरा कृत्य भारतीय न्याय संहिता के तहत कूट-रचित दस्तावेज तैयार करने, धोखाधड़ी, संगठित आपराधिक षड्यंत्र की स्पष्ट श्रेणी में आता है। -डॉ. भानू कपिल, शिक्षाविद् हर साल चार से ज्यादा संस्थाएं करती हैं निरीक्षण, पर किसी ने आपत्ति नहीं की सीधे तौर पर ये जिम्मेदार आयुक्तालय की टीम निरीक्षण करती है, उसी आधार पर विवि की टीम जांच कर एफिलिएशन देती है। मैं इस पद पर अभी आया हूं। पहले एफिलिएशन का काम कोई और देखता था।
- डॉ. राकेश डामोर, एफिलिएशन इंचार्ज, जीजीटीयू मैंने कुछ समय पहले ही जॉइन किया है। कोई मामला है, तो जांच करवा लेंगे। हमारी प्रक्रिया के तहत 1 सरकारी कॉलेज के प्रिंसिपल और 2 अन्य सदस्यों की टीम निरीक्षण करती है।
- प्रो. विजय सिंह, संयुक्त निदेशक (निजी संस्था) कॉलेज प्रशासन ने अतिक्रमण कर रखा है, जिसका हमने नोटिस भी दे रखा है। अतिक्रमण के मामले का फैसला फिलहाल कोर्ट में है, वहां से ही आगे की प्रक्रिया तय होगी।
- नेहा जैन, तहसीलदार