राजस्थान स्टेट ओपन स्कूल में फेल से पास करने के लिए अंकतालिकाओं में फर्जी तरीके से किए गए संशोधन पर शिक्षा विभाग ने चुप्पी साध रखी है। खुद की जांच रिपोर्ट आने के बाद भी विभाग ने मामला एसओजी को नहीं सौंपा है, जबकि स्टेट ओपन में एक संविदा कर्मी ने सुपर एडमिन बनकर 1107 अंकतालिकाओं में संशोधन कर दिए। इसमें नाम और जन्म तिथि बदलकर कई अभ्यर्थियों की अंकतालिकाएं दूसरे के नाम से जारी कर दी और कई अभ्यर्थियों को फेल से पास कर दिया। अब विभाग मामला एसओजी को सौंपने से पहले लीगल राय लेने की तैयारी कर रहा है। स्टेट ओपन में 5 साल में हुए इस फर्जीवाड़े को लेकर किसी को भनक तक नहीं लगी, जबकि वर्ष 2021 से लेकर अब तक इन सचिव और निदेशक के पद पर कई अधिकारी लग चुके हैं। डीओआईटी से मिलीभगत करके संविदा कर्मी अपना खेल करता रहा और स्टेट ओपन के यह अधिकारी आंख मूंदकर बैठे रहे। मामला सामने आने के बाद विभाग ने जांच कराई तो बड़ा खेल सामने आया। स्टेट ओपन ने भले ही संविदा कर्मी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी हो, लेकिन अभी तक आगे कोई कार्रवाई नहीं हुई। फर्जीवाड़े से किसने फायदा उठाया, रिकॉर्ड नहीं बड़ा सवाल यह है कि फर्जी तरीके से तैयार अंकतालिकाओं से अब तक किसने क्या फायदा उठाया। इसका कोई रिकॉर्ड नहीं है। मामले की एसओजी से जांच कराने पर नई परतें खुल सकती हैं। अखिल राजस्थान विद्यालय शिक्षक संघ (अरस्तु) के प्रदेशाध्यक्ष रामकृष्ण अग्रवाल का कहना है कि शिक्षा मंत्री हमेशा कहते हैं कि भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं करूंगा, इसलिए वे इस फर्जीवाड़े की जांच एसओजी को जल्द से जल्द सौंपे। संविदा कर्मी का चयन कौन सी चयन समिति ने किया और सुपर एडमिन के अधिकार किसने दिए, किसकी सिफारिश से दिए। इसकी भी जांच होनी चाहिए। शिक्षामंत्री मदन दिलावर ने कहा कि स्टेट ओपन के फर्जीवाड़े की जांच रिपोर्ट पर लीगल राय ली जाएगी। इसके बाद आगे कार्रवाई की जाएगी।