राजस्थान में गिग इकोनॉमी और त्वरित कमाई का बढ़ता आकर्षण अब उच्च शिक्षा पर असर दिखाने लगा है। उच्च शिक्षा विभाग के वार्षिक प्रगति प्रतिवेदन (2025-26) के विश्लेषण में सामने आया है कि यूजी-पीजी में नामांकन इस सत्र में 4.23% घटकर 12.55 लाख रह गया। यह लगातार दूसरा साल है, जब उच्च शिक्षा में निगेटिव ग्रोथ दर्ज हुई है। महामारी के दौरान बढ़ा नामांकन भी अब सिकुड़ चुका है। सबसे ज्यादा असर लड़कों पर दिखा है, जिनके नामांकन में 5.60% की गिरावट आई है। विशेषज्ञ मान रहे हैं कि गिग सेक्टर में तेजी से बढ़ते अवसर युवाओं को सीधे वर्कफोर्स की ओर खींच रहे हैं। इस गिरावट के बीच उदयपुर संभाग मजबूत अपवाद बनकर उभरा है। प्रदेश में प्रति कॉलेज औसतन 513 विद्यार्थी हैं, जबकि उदयपुर के सुविवि से संबद्ध कॉलेजों में यह आंकड़ा लगभग दोगुना 1,030 विद्यार्थी प्रति कॉलेज है। डिग्री का दबदबा, 71% विद्यार्थी सिर्फ आर्ट्स में प्रदेश के 71.10% विद्यार्थी अकेले कला संकाय में नामांकित हैं। भीड़ की प्रमुख वजह कम फीस और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए पात्रता है। रोजगार की गारंटी नहीं होने के बावजूद यह संकाय सबसे अधिक विद्यार्थियों को आकर्षित कर रहा है। लड़कों के नामांकन में 5.60 प्रतिशत की बड़ी गिरावट : विभागाध्यक्ष सुविवि के लोक प्रशासन विभागाध्यक्ष डॉ. गिरिराज सिंह चौहान के अनुसार उच्च शिक्षा में सबसे चिंताजनक संकेत लड़कों के नामांकन में 5.60% और लड़कियों में 3.12% की गिरावट है। वर्तमान में कुल नामांकन में 55.91% हिस्सेदारी छात्राओं की है। डॉ. चौहान के अनुसार आर्थिक दबाव और त्वरित कमाई की चाहत के चलते बड़ी संख्या में युवा लॉजिस्टिक्स, रिटेल, सिक्योरिटी सर्विसेज, डिलीवरी और राइड-शेयरिंग जैसे गिग सेक्टर में जा रहे हैं। संविदा व अस्थायी नौकरियों के बढ़ते अवसरों से वे बीए-बीकॉम जैसी तीन वर्षीय डिग्री के बजाय सीधे रोजगार चुन रहे हैं। उम्मीद बाकी...उदयपुर संभाग बना हाई इनरोलमेंट मॉडल उच्च शिक्षा में उदयपुर संभाग हाई इनरोलमेंट-लो इंस्टीट्यूशनल शेयर मॉडल का उदाहरण बनकर उभरा है। राज्य के कुल महाविद्यालयों में इसकी हिस्सेदारी महज 5.3% (207 कॉलेज) है, लेकिन कुल छात्र नामांकन में संभाग अकेले करीब 8% (2.25 लाख) का भार संभाल रहा है। आदिवासी बहुल यह क्षेत्र अपने जिलों के साथ-साथ सिरोही तथा गुजरात और मध्य प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों के विद्यार्थियों को भी आकर्षित कर रहा है। कम कॉलेजों में अधिक छात्र होने से यहां संसाधनों का उपयोग राज्य में सबसे अधिक है। प्रदेश में हर 100 लड़कों पर 129 लड़कियां उच्च शिक्षा में... आंकड़ों का दूसरा बड़ा संकेत जेंडर गैप का उलटना है। अब राज्य में हर 100 लड़कों पर 129 लड़कियां उच्च शिक्षा में नामांकित हैं।