ग्राउंड फ्लोर का ओपीडी ब्लॉक उखड़ा पड़ा है। दीवारें टूटी हुई हैं। छत से फॉल्स सीलिंग हटाई जा चुकी है। इस हिस्से को बंद कर दिया गया है। लिफ्ट के ठीक पीछे वाले हिस्से में चार अलग-अलग कमरों के बाहर मरीजों की भीड़ है। पहली से लेकर पांचवीं मंजिल तक ऐसे ही हालात हैं। हर मंजिल की छतें उखड़ी हुई हैं। पिलर्स की स्ट्रेंथ बढ़ाने का काम चल रहा है। बाहरी दीवारों को भी तोड़ दिया गया है। सुरक्षा कर्मी मरीजों को उधर जाने से रोकते हैं। यह हालात मेडिकल कॉलेज से संबद्ध उस सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक के हैं, जिसका काम पिछले करीब 15 दिन से बंद पड़ा है। बिल्डिंग की पांचों मंजिल पिछले तीन साल से उखड़ी पड़ी हैं। इससे वहां काम करने वाला स्टाफ तो असहज है ही, मरीजों को भी भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। एसएसबी में 8 तरह की गंभीर बीमारियों के पीड़ित मरीजों का इलाज होता है। न्यूरोलॉजी, न्यूरो सर्जरी, गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी, गैस्ट्रो सर्जरी, एंडोक्राइनोलॉजी, प्लास्टिक सर्जरी, पीडिया सर्जरी के अलावा नेफ्रोलॉजी विभाग में आने वाले किडनी के रोगियों की डायलिसिस भी यहीं होती है। अस्पताल के सभी 210 बेड फुल रहते हैं। सीटी, एमआरआई सहित सभी तरह की जांचों की सुविधा होने के कारण रोज करीब तीन हजार लोगों की आवाजाही रहती है। खतरा इसलिए...छत पर ही कर दी पाइप की फिटिंग
एसएसबी की पांच मंजिला बिल्डिंग की छतों से कूलिंग सिस्टम बंधा हुआ है। फायर सेफ्टी के पाइपों की फिटिंग भी छत पर ही है। भारी भरकम मशीनें हैं। टेक्निकल जांच में पता चला कि पिलर की स्ट्रेंथ भी कमजोर है। गौरतलब है कि 30 दिसंबर 2016 को तत्कालीन केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने एसएसबी की नींव रखी थी। इसके निर्माण पर 120 करोड़ केंद्र और 30 करोड़ राज्य सरकार के खर्च हुए थे। 2017-18 में बिल्डिंग तैयार हो गई, लेकिन उपयोग कोरोना काल में हुआ तो इसका ड्रेनेज सिस्टम जाम हो गया। बिल्डिंग का काम सही नहीं हुआ, जिम्मेदारी तय होनी चाहिए
सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक का निर्माण सही नहीं हुआ है। पिलर की स्ट्रेंथ बढ़ाने का मतलब साफ है कि डिजाइन सही नहीं था। निर्माण एजेंसी की जिम्मेदारी केंद्र सरकार को तय करनी चाहिए। पूरी बिल्डिंग में उखाड़ रखा है। ऐसे में मरीजों को वहां रखना जोखिमपूर्ण हो सकता है। वार्डों की फॉल्स सीलिंग तक उखड़ी हुई हैं। बिल्डिंग का काम शीघ्र पूरा करने के लिए एजेंसी पर दबाव बनाया जाए या सरकार से बजट लेकर काम कराया जाए। भास्कर एक्सपर्ट - - नरेश जोशी, एक्सईएन (रि.) भास्कर इनसाइट - 3 साल पहले अनसेफ घोषित किया था, बढ़ रही मरीजों की भीड़ सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक की पांचवीं मंजिल निर्माता कंपनी ने तीन साल पहले अनसेफ घोषित कर दी है, क्योंकि शुरुआत में पांचवीं मंजिल की आरसीसी से बनी छत झड़ने से डॉक्टर्स चैंबर, रिकवरी रूम सहित कुछ कमरों से फॉल्स सीलिंग गिर पड़ी थी। अब ग्राउंड फ्लोर तक यही हालात हैं। बिल्डिंग का निर्माण 2016 में हॉस्पिटल सर्विसेज कंसल्टेंसी को-ऑपरेशन लिमिटेड (एचएससीसी) ने किया था। अब यही कंपनी डेढ़ साल से मरम्मत करवा रही है। बताया जा रहा है कि फंड की कमी बताकर काम बंद कर दिया गया है। “बिल्डिंग का काम जल्दी पूरा करने के लिए कंपनी को कई बार कहा जा चुका है। अब फंड की कमी बताकर काम रोक दिया। मरीजों को सेफ जोन में ही रखा जा रहा है। ओपीडी भी दूसरी तरफ शिफ्ट कर दी गई है।”
-डॉ. संजीव बुरी, अधीक्षक, सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक