भास्कर न्यूज| बाड़मेर जालीपा क्षेत्र में कोयला खनन परियोजना के नाम पर स्कूलों को ही जमींदोज करने की तैयारी कर ली है। प्राथमिक विद्यालय डूडियों की ढाणी वीरमनगर जालीपा के अस्तित्व पर आए संकट के कारण ग्रामीणों में रोष व्याप्त है। अधिकारियों ने कथित साजिश के तहत स्कूल के नामांकन को कम दिखाकर इसे दूसरे विद्यालय में मर्ज कर दिया है, इससे अब बच्चे घर बैठने को मजबूर है। इस संबंध में ग्रामीणों ने विरोध दर्ज करवाकर यही मांग रखी है कि वीरमनगर जालीपा को करणीनगर में विस्थापित करने के साथ ही स्कूल को भी इसी गांव में शिफ्ट किया जाए। राजकीय प्राथमिक विद्यालय, डूडियों की ढाणी (वीरमनगर), राप्रावि, बेनीवालों की ढाणी (वीरमनगर), राउमावि हरसाणी फांटा (चक धोलका), राजकीय स्कूल कुम्हारों की ढाणी (चक धोलका), राप्रावि मांधल की ढाणी शामिल है जालीपा क्षेत्र की आबादी विस्थापित होकर करणीनगर में बस रही है। कायदे से स्कूल को भी इसी नई आबादी के साथ करणीनगर में शिफ्ट किया जाना चाहिए था, लेकिन शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने इसके उलट फैसला लिया। नतीजा यह है कि आज करणीनगर और डूडियों की ढाणी के आसपास रहने वाले लगभग 50 परिवारों के बच्चों के पास पढ़ने के लिए कोई नजदीक स्कूल नहीं बची है। 3 किलोमीटर के दायरे में कोई दूसरा सरकारी स्कूल नहीं है। ^विरमनगर जालीपा की स्कूलों के मर्ज होने और बच्चों के शिक्षा से वंचित होने के संबंध में ग्रामीणों ने एडीएम साहब को ज्ञापन दिया है। लेकिन यह मामला मेरी जानकारी में नहीं है। - किशनसिंह, डीईओ बाड़मेर। बाड़मेर. अवाप्त भूमि पर सरकारी स्कूल का भवन गिराया । मेरे पूर्वज मूलाराम ने आज से दशकों पहले एक सपना देखा था कि गांव का हर बच्चा शिक्षित बने। उन्होंने अपनी 3 बीघा कीमती जमीन केवल इसलिए दान दी थी । जालीपा क्षेत्र की आबादी विस्थापित होकर अब करणीनगर में बस रही है। स्कूल को करणीनगर में शिफ्ट करने के बजाय उसे जानबूझकर 3 किलोमीटर दूर एक दूसरे विद्यालय में मर्ज कर दिया गया। इसका परिणाम यह है कि 50 से ज्यादा परिवारों की केवल एक ही मांग है कि वीरमनगर जालीपा के स्कूल को करणीनगर में विस्थापित किया जाए। अगर प्रशासन ने जल्द ही अपने गलत तथ्यों को सुधारकर स्कूल को नई आबादी के साथ शिफ्ट नहीं करता है, तो ग्रामीणों का विरोध बढ़ेगा। ग्रामीणों ने बताया कि उनके पूर्वज मूलाराम ने समाज को शिक्षित करने के लिए अपनी 3 बीघा कीमती जमीन दान में दी थी।आरोप है कि खनन कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए प्रशासन ने इस दान की गई जमीन और स्कूल के अस्तित्व को ही खत्म करने का मन बना लिया है। नियमों के मुताबिक प्राथमिक स्कूल के लिए पर्याप्त नामांकन होने के बावजूद, शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने जानबूझकर नामांकन कम दिखाया। स्कूल में 27 बच्चे नियमित पढ़ रहे थे, लेकिन षड्यंत्र के तहत एकमात्र शिक्षक को प्रतिनियुक्ति पर भेज दिया। जैसे ही स्कूल से शिक्षक हटाया गया स्कूल को ही अनुपयोगी घोषित कर दिया।